राज्यसभा में छत्तीसगढ़ से महतारी वंदन : पार्षद की देहरी से ‘संसद’ की दहलीज तक, जानिए कौन हैं लक्ष्मी वर्मा ?

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नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। राजनीति में जब ‘धैर्य’ और ‘समर्पण’ का नाम लिया जाएगा, तो छत्तीसगढ़ भाजपा की नेत्री लक्ष्मी वर्मा का नाम शीर्ष पर होगा। महतारी वंदन की बयार के बीच, भाजपा ने एक ज़मीनी कार्यकर्ता को राज्यसभा का टिकट देकर यह साबित कर दिया है कि संगठन में सेवा ही सर्वोपरि है।

आइए, नज़र डालते हैं लक्ष्मी वर्मा के पार्षद से राज्यसभा तक के उस सियासी सफर पर, जो हर कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा है:

1. सफर का आगाज़: वार्ड की गलियों से (1994)

लक्ष्मी वर्मा के राजनैतिक जीवन की नींव 1994 में पड़ी, जब वे रायपुर नगर पालिका निगम के वार्ड नं. 07 से पार्षद निर्वाचित हुईं। ज़मीनी मुद्दों से जुड़ाव और जनता के बीच उनकी सक्रियता ने यहीं से उनके बड़े राजनैतिक भविष्य की पटकथा लिख दी थी।

2. पंचायती राज और जिला नेतृत्व (2010-2015)

​पार्षद के बाद उन्होंने ग्रामीण राजनीति की ओर रुख किया और 21 फरवरी 2010 से 2015 तक जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष (निर्वाचित) के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण विकास और पंचायती राज व्यवस्था को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई।

3. केंद्र और संगठन में बढ़ता कद (2019-2023)

  • स्वतंत्र निदेशक: 2019 से 2021 तक उन्होंने केंद्र सरकार के MSTC (स्टील मिनिस्ट्री) में स्वतंत्र निदेशक के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाली।
  • प्रदेश उपाध्यक्ष: संगठन के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए 2022 में उन्हें भाजपा छत्तीसगढ़ का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया।
  • मीडिया और प्रभार: वे गरियाबंद जिला की प्रभारी और भाजपा की मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर टीवी डिबेट्स में विपक्ष को करारा जवाब देती नज़र आईं।

4. समाज और महिला शक्ति की आवाज़

​लक्ष्मी वर्मा केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि कुर्मी क्षत्रिय समाज की एक सशक्त आवाज़ हैं। वे अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय पंचायत परिषद की राष्ट्रीय महासचिव जैसे बड़े पदों पर आसीन रहीं, जिससे उनकी पकड़ न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बनी।

5. महतारी वंदन का चेहरा: राज्य महिला आयोग

​हाल ही में 7 अक्टूबर 2024 को उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य बनाया गया था। लेकिन किस्मत और संगठन को कुछ और ही मंज़ूर था—आज उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने प्रदेश की ‘महतारी’ को संसद में सबसे बड़ा सम्मान दे दिया है।

सादगी, सक्रियता और सफलता

एम.ए. (लोक प्रशासन) तक शिक्षित लक्ष्मी वर्मा ने पिछले 30 सालों में पार्षद से लेकर राज्यसभा उम्मीदवार तक का सफर अपनी मेहनत के दम पर तय किया है। रायपुर के शांति नगर से निकलकर दिल्ली के संसद भवन तक पहुँचने वाली लक्ष्मी वर्मा अब छत्तीसगढ़ की आवाज़ बनकर देश की सबसे बड़ी पंचायत में गूँजेंगी।

“लक्ष्मी वर्मा का राज्यसभा जाना केवल एक पद की प्राप्ति नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की उन लाखों महिलाओं की जीत है जो ज़मीनी स्तर पर संघर्ष कर नेतृत्व की मिसाल पेश करती हैं।”

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