
एक पद पर दो व्याख्याताओं की नियुक्ति, वरिष्ठ व्याख्याता को हटाकर जूनियर को प्राथमिकता, रिक्त पदों के बावजूद सीमित काउंसिलिंग, समानता के सिद्धांत का उल्लंघन, प्रशासनिक अनदेखी पर गहरी नाराजगी
नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। दुर्ग। छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ के संयोजक एवं प्रदेश अध्यक्ष तथा शैक्षिक साझा मंच के प्रदेश संचालक विष्णु प्रसाद साहू ने दुर्ग संभाग में आयोजित वाणिज्य संकाय के काउंसिलिंग प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया है। उन्होंने युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियों और पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए इसे अव्यवहारिक और अन्यायपूर्ण बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब इस मुद्दे को लेकर न्यायालय की शरण लेंगे।

विवाद की शुरुआत: एक पद पर दो नियुक्ति
विष्णु साहू ने बताया कि वर्ष 2022 में स्थानांतरण के तहत उन्हें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घोटवानी में 14 अक्टूबर को नियुक्त किया गया। यहां वाणिज्य संकाय का केवल एक स्वीकृत पद है। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 27 अक्टूबर को एक अन्य व्याख्याता को उसी पद पर कार्यभार ग्रहण करा दिया गया। बाद में उस व्याख्याता को ‘अतिशेष’ मानते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खिलोरा कला भेजा गया, लेकिन वहां संकाय प्रारंभ नहीं किया गया। इसके बाद वही व्याख्याता फिर से घोटवानी लौट आए, जिससे वरिष्ठ व्याख्याता होने के बावजूद विष्णु साहू को बाहर होना पड़ा।
महिला व्याख्याताओं को प्राथमिकता, वरिष्ठों की अनदेखी
दुर्ग जिले में वाणिज्य संकाय के कुल 15 व्याख्याता अतिशेष घोषित किए गए, जिनमें साहू का क्रमांक 14वां रहा। इन 15 में से 12 महिला व्याख्याताएं थीं, जिनमें से 2 जूनियर महिला व्याख्याताओं को प्राथमिकता में वरीयता दी गई। एक व्याख्याता अनुपस्थित रही। वहीं घोटा विद्यालय के एक व्याख्याता 7-8 वर्षों से पदस्थ हैं लेकिन उन्होंने अब तक संकाय प्रारंभ नहीं किया, इसके बावजूद उन्हें युक्तियुक्तकरण में शामिल किया गया।
रिक्त पदों की अनदेखी, प्रक्रिया में विसंगति
दुर्ग जिले में वाणिज्य संकाय के 17 पद रिक्त हैं, फिर भी केवल 13 पदों पर ही काउंसिलिंग कराई गई। जबकि अन्य जिलों जैसे महासमुंद, मनेंद्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी, जांजगीर-चांपा में अतिशेष व्याख्याताओं को रिक्त पदों पर नियुक्त किया गया। साहू का कहना है कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरे प्रदेश में समान और एकरूप होनी चाहिए, किंतु दुर्ग संभाग में इसके विपरीत किया गया है।
प्रशासन की चुप्पी, अब न्यायालय की राह
विष्णु साहू ने बताया कि इस गंभीर मामले को लेकर उन्होंने जिला कलेक्टर, संचालक एवं जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया, लेकिन कहीं से भी कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब वे न्यायालय में युक्तियुक्तकरण की विसंगतियों के खिलाफ वाद दायर करेंगे।
विष्णु साहू का बयान :
“शासन-प्रशासन द्वारा जिस प्रकार से पक्षपातपूर्ण और अव्यवहारिक ढंग से युक्तियुक्तकरण किया गया है, वह शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। न्याय की आस अब केवल न्यायालय से है।”


About The Author










































