शराब के नशे में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का सहायक ग्रेड 2 कैमरे में हुआ कैद

नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। जांजगीर-चांपा। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय जांजगीर एक शर्मनाक घटना का केंद्र बन गया, जब वहां पदस्थ सहायक ग्रेड-2 का कर्मचारी रुपेश राठौर शराब के नशे में कैमरे में अशोभनीय और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए दिखाई दिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आ गया और कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने तत्काल प्रभाव से उक्त कर्मचारी को निलंबित कर दिया।

कैमरे में कैद हुई शर्मनाक हरकत
मिली जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो करीब 2 से 3 दिन पुराना बताया जा रहा है, जिसमें कर्मचारी रुपेश राठौर कार्यालय में शराब के नशे में झूमते हुए गालियों के साथ कहता नजर आ रहा है – “सब कमावा, सब खावा”। यह वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो गया, जिसने शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल कर दिया। वीडियो बनते ही वह चुपचाप खड़ा हो गया, लेकिन मेज पर रखी नाश्ते की प्लेट, और डस्टबिन के पास पड़ा गिला डिस्पोजल, वीडियो की पुष्टि करता नजर आया। हालांकि वायरल वीडियो की पुष्टि अमर उजाला ने नहीं की है, परंतु वीडियो की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।
सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन
कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(7) और 23 का स्पष्ट उल्लंघन है। इसी आधार पर रुपेश राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।निलंबन के दौरान रुपेश राठौर को नवागढ़ विकासखंड शिक्षा कार्यालय को अस्थायी मुख्यालय निर्धारित किया गया है। साथ ही, नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वहन भत्ता प्रदान किया जाएगा।
क्या कहती है यह घटना ?
एक ओर जहाँ शिक्षा विभाग बच्चों के भविष्य निर्माण की नींव है, वहीं इस प्रकार की घटनाएं उस व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती हैं। सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और नैतिकता की यह गिरावट आम जनता में शासन के प्रति विश्वास को भी चोट पहुँचाती है। आवश्यक है कि ऐसे मामलों में सिर्फ निलंबन नहीं, बल्कि विभागीय जांच और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

शिक्षा विभाग के दफ्तर में नशे की शर्मनाक हरकत
जांजगीर-चांपा के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी रुपेश राठौर का शराब के नशे में वायरल वीडियो न केवल व्यक्तिगत अनुशासनहीनता का उदाहरण है, बल्कि यह पूरे सरकारी तंत्र और समाज के लिए एक चेतावनी है।
यह घटना कई महत्वपूर्ण सबक देती है:
1. सरकारी कार्यालय कोई ‘निजी अड्डा’ नहीं है
सरकारी दफ्तर जनता की सेवा का केंद्र होता है, वहाँ शराब पीकर आना या व्यवहार में अशोभनीय भाषा का प्रयोग करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि जनता के विश्वास के साथ धोखा है
2. आचरण ही पहचान है
सरकारी कर्मचारी होने का अर्थ केवल नौकरी नहीं, बल्कि आचरण में अनुशासन, मर्यादा और जवाबदेही है। एक गलत व्यवहार पूरे विभाग की छवि धूमिल कर सकता है।
3. प्रशासन की तत्परता सराहनीय, पर स्थायी सुधार जरूरी
कलेक्टर द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई प्रशंसनीय है, लेकिन ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सघन निगरानी, मनोवैज्ञानिक परामर्श, और विभागीय अनुशासन प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
4. टेक्नोलॉजी के युग में कोई भी व्यवहार छिपा नहीं रह सकता
आज का युग कैमरे और सोशल मीडिया का है। कोई भी अनुचित कृत्य मिनटों में सामने आ सकता है। इसलिए हर कर्मचारी को सदैव सावधानी और ईमानदारी बरतनी चाहिए।
5. दूसरों के लिए सबक बनें, चेतावनी नहीं
एक कर्मचारी का गलत आचरण अनेक नवयुवकों के लिए चेतावनी है। अगर आप किसी जिम्मेदार पद पर हैं, तो आपको दूसरों के लिए प्रेरणा बनना चाहिए, शर्मिंदगी नहीं।
“सरकारी सेवा में सिर्फ वेतन नहीं, जिम्मेदारी भी मिलती है।
और जब जिम्मेदारी नशे में बहक जाए, तो व्यवस्था खुद नशे में डगमगाने लगती है।”


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