जब पुल ने साथ छोड़ा, मितानिन बनी सहारा, पीठ पर जीवन ढोकर सड़क किनारे रचा गया चमत्कार
नई पहल न्यूज नेटवर्क। जशपुर। जिले से इंसानियत, साहस और सरकारी सिस्टम की पोल खोलती एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने एक तरफ दिल को छू लिया तो दूसरी ओर व्यवस्था की लाचारी उजागर कर दी। सतालूटोली गांव की मितानिन बिफनी बाई और दाई रेलों बाई ने गर्भवती महिला मंजीता बाई को बचाने के लिए वो कर दिखाया, जिसे देखकर हर आंख नम हो जाए। टूटा हुआ पुल, तेज बहाव वाली नदी और कंधों पर जिंदगी का भार — मितानिन ने जान की बाजी लगाकर गर्भवती को पीठ पर लादा और नदी पार की। जैसे ही वे सड़क किनारे पहुंचे, महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। गांव के ही ललित यादव के घर के सामने मितानिन, दाई और महिला की मां ने मिलकर वहीं सड़क किनारे सुरक्षित डिलीवरी कराई।


बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, शिक्षक नहीं पहुंच पाते

स्थानीय निवासी ललित यादव बताते हैं – “अस्पताल महज़ डेढ़ किलोमीटर दूर है, लेकिन रास्ता ऐसा है जैसे मौत से गुजरना हो।” अब गांव वाले सवाल कर रहे हैं। क्या यही है वह विकास, जिसकी सरकार बातें करती है?


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