नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। कोरबा। जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड की नवापारा पंचायत में लापरवाही, भ्रष्टाचार और नशे की एक तस्वीर ने स्थानीय शासन-प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां पंचायत सचिव रामेश्वर प्रसाद राजवाड़े की कार्यशैली से आक्रोशित ग्रामीणों ने एक और वीडियो वायरल कर दिया है, जिसमें सचिव पंचायत भवन में शराब के नशे में बेहोश पड़े दिखाई दे रहे हैं।
नशे में धुत सचिव, पंचायत भवन बना आरामगाह

ग्रामीणों ने बताया कि सचिव राजवाड़े लगातार शराब के नशे में पंचायत कार्यालय आते हैं और अधिकतर समय वहीं पड़े रहते हैं। कार्य के समय जब भी कोई नागरिक उनसे दस्तावेज़ या प्रमाणपत्रों के संबंध में संपर्क करता है, तो सचिव अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं और गुस्से में चिल्लाने लगते हैं। उनकी यह लापरवाही और असामाजिक हरकतें अब आम हो चुकी हैं। इससे पहले भी उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह पंचायत भवन में नशे की हालत में नींद में लुढ़के हुए थे। अब फिर एक ताज़ा वीडियो सामने आया है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया है।

वायरल वीडियो से मचा हड़कंपयह वीडियो स्थानीय युवाओं द्वारा रिकॉर्ड किया गया, जो किसी दस्तावेज के सत्यापन के लिए पंचायत भवन पहुंचे थे। जब उन्हें इस स्थिति में सचिव दिखे, तो उन्होंने तुरंत वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया।
ग्रामीणों का आरोप: नशे में धुत, काम में ढीले
सचिव नियमित रूप से पंचायत भवन में शराब पीते हैं।
समय पर कार्य नहीं करते, दस्तावेज़ों में अनियमितता बरतते हैं।
जनता को गालियां देकर भगा देते हैं।
पंचायत की योजनाओं में पारदर्शिता नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत कार्यों से सचिव का कोई लेना-देना नहीं रह गया है। अब यह भवन उनके लिए केवल आरामगाह बनकर रह गया है।
प्रशासन की अनदेखी भी सवालों के घेरे में
ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या केवल नवापारा पंचायत तक सीमित नहीं है। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के कई पंचायतों में सचिवों के गैर-जिम्मेदार रवैये की कहानियां आम हो गई हैं।शिकायत करने पर अधिकारी सिर्फ औपचारिक नोटिस देकर मामले को रफा-दफा कर देते हैं। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि जिले में सचिवों की भारी कमी है। एक ही सचिव को दो से तीन पंचायतों का भार सौंपा गया है, जिससे नियंत्रण असंभव हो गया है।
ग्रामीणों की दो टूक: ऐसा सचिव नहीं चाहिए
ग्रामीणों ने कहा कि,”अगर कोई सचिव काम नहीं कर रहा, जनता को गाली दे रहा, पैसे खा रहा। तो उसके होने से ज्यादा अच्छा है कि ना हो। कम से कम जनता को धोखा तो नहीं मिलेगा।”उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सचिव राजवाड़े को तत्काल हटाया जाए, उसके खिलाफ निलंबन या बर्खास्तगी जैसी सख्त कार्रवाई हो, और पंचायत भवन को फिर से जनहित के कार्यों के लिए समर्पित किया जाए।

पंचायत की आड़ में प्रशासनिक अराजकता
जब पंचायत व्यवस्था की नींव में ही भ्रष्टाचार, लापरवाही और नशाखोरी समा जाए। तो सवाल सिर्फ एक पंचायत का नहीं, ग्राम स्वराज और लोकतंत्र की असफलता का हो जाता है। ऐसे में शासन की जिम्मेदारी है कि वह केवल खानापूर्ति ना कर, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की मिसाल पेश करे।


About The Author










































