शरीर से कमज़ोर, हक़ की लड़ाई में मज़बूत राजधानी में दिव्यांगजनों को घसीटा गया, पीटा गया, और चुप रहा सिस्टम !
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। राजधानी में दिव्यांगजनों पर जिस तरह की पुलिसिया बर्बरता हुई, उसने शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को एक बार फिर उजागर कर दिया है। विधानसभा घेराव करने पहुंचे छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बस स्टैंड से घसीटकर गाड़ियों में फेंका गया, महिलाओं से बदसलूकी की गई, मोबाइल तोड़े गए, और एक दिव्यांग का हाथ तक टूट गया। इस बर्बर कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने मोर्चा संभाला और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को “संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन” बताया। उन्होंने विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाते हुए सवाल किया –
“पुलिस यह कार्रवाई किसके आदेश पर कर रही है ? दिव्यांगजन क्या आतंकवादी हैं?”
संगीता सिन्हा ने सदन में उठाई आवाज़

संगीता सिन्हा ने आरोप लगाया कि मुंगेली के एक दिव्यांग प्रदर्शनकारी का हाथ टूट गया और कई के कपड़े तक फट गए। “दिव्यांगजनों की लड़ाई उनके हक़ की है, और उन्हें इस तरह से अपमानित करना सभ्य समाज पर धब्बा है। संगीता सिन्हा हैं जो संजारी बालोद में भी दिव्यांग संघ के प्रदर्शन में पहुंचकर समर्थन कर चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार यदि अब भी चुप बैठी रही तो यह साफ संदेश होगा कि वह फर्जी प्रमाणपत्रधारियों को बचाने के लिए असली दिव्यांगों को कुचलने में संकोच नहीं कर रही।

छह सूत्रीय मांगें, जिन पर शासन है मौन :
1. 148 फर्जी प्रमाणपत्रधारियों की बर्खास्तगी और मेडिकल बोर्ड से जांच
2. बैकलॉग पदों पर विशेष भर्ती अभियान
3. पेंशन 5,000 रुपये प्रति माह
4. बीपीएल शर्त हटाना
5. अविवाहित दिव्यांग महिलाओं को महतारी वंदन योजना में शामिल करना
6. पदोन्नति में 3% आरक्षण के पालन हेतु परिपत्र जारी करना
फर्जी प्रमाणपत्रों पर 148 अधिकारियों की नियुक्ति !
संघ का आरोप है कि CGPSC के माध्यम से डिप्टी कलेक्टर, लेखा अधिकारी, नायब तहसीलदार और अन्य पदों पर ऐसे लोग चयनित हुए हैं जिन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों का सहारा लिया। इससे असली दिव्यांगजन हाशिए पर चले गए हैं।
वीडियो बना प्रमाण – बर्बरता का सच
वायरल हो चुके वीडियो में पुलिस को महिलाओं को घसीटते, अपमानित करते और गाड़ियों में जबरन ठूंसते हुए साफ देखा जा सकता है। कई प्रदर्शनकारियों के मोबाइल छीने गए, कई को गालियां दी गईं।
संघ का संकल्प: “हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं”
संघ के अध्यक्ष बोहितराम चंद्राकर और सदस्य नितीश सोनी ने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा। “हम शारीरिक रूप से अक्षम ज़रूर हैं, लेकिन इस अन्याय के खिलाफ हमारी आवाज़ को कोई दबा नहीं सकता।” यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं, व्यवस्था की पोल खोलने वाला आईना है – और यह आईना सरकार से जवाब मांग रहा है।


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