प्रार्थना सभा या धर्म का सौदा? बिलासपुर में शिक्षिका के घर पर हिंदू संगठन की दबंग एंट्री
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बिलासपुर। शहर में एक बार फिर धर्मांतरण के सनसनीखेज मामले से सन्न रह गया है। सरकंडा थाना क्षेत्र के गीतांजलि सिटी फेस-2 में स्थित आत्मानंद स्कूल की शिक्षिका के आवास पर रविवार को कथित “प्रार्थना सभा” के नाम पर धर्मांतरण का खेल चल रहा था। जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग उस सभा में शामिल हुए थे। लेकिन अचानक मिली गोपनीय सूचना पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और पुलिस टीम मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखकर कुछ लोग घबराए, तो कुछ ने सभा को ‘साधारण धार्मिक आयोजन’ बताने की कोशिश की, परंतु मौके पर मौजूद हिन्दू संगठनों ने इसे प्रलोभन और मानसिक दबाव के ज़रिए धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश बताया।

क्या चल रहा था शिक्षिका के घर में ?

‘प्रार्थना सभा’ के नाम पर गुप्त तरीके से लोगों को बुलाया गया था। मौके पर मौजूद लोग लगातार ‘यीशु मसीह की आराधना’ कर रहे थे। घर के भीतर मिले धार्मिक साहित्य, बाइबल और कथित रूप से प्रसाद के नाम पर वितरित वस्तुएं
थाने में आमना-सामना
घटना के बाद शिक्षिका, उसके समर्थक और हिंदू संगठन के प्रतिनिधि—दोनों पक्ष सरकंडा थाने पहुंचे। फिलहाल पुलिस द्वारा शिक्षिका से पूछताछ जारी है। पुलिस सूत्रों की मानें तो यदि जांच में जबरन धर्मांतरण या किसी प्रकार की मानसिक या आर्थिक लालच का तत्व सामने आता है, तो छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

धर्मांतरण पर फिर गरमाया बिलासपुर – प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल !
इस मामले ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ के संवेदनशील जिलों में धर्मांतरण के बढ़ते नेटवर्क और प्रशासन की सतर्कता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि, यह कोई पहली घटना नहीं है, बिलासपुर समेत पूरे प्रदेश में प्रार्थना सभा के नाम पर सुनियोजित धर्मांतरण अभियान चलाया जा रहा है। यह आस्था नहीं, एक वैचारिक युद्ध है। धर्म की आड़ में फैलते वैचारिक षड्यंत्रों पर प्रशासन को अब और अधिक सतर्क और सक्रिय होने की आवश्यकता है। प्रार्थना सभा की आड़ में मौलिक आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला किसी भी समाज के लिए खतरनाक संकेत हैं।
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