खदान से राष्ट्रनिर्माण तक : केंद्रीय राज्यमंत्री सतीश दुबे का SECL दौरा बना कर्मियों के लिए ऊर्जा और सम्मान का प्रतीक
नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरिया। कोयले को यूं ही “ब्लैक गोल्ड” नहीं कहा जाता – इसे उजाले में बदलने वाले वे खनिक हैं जो ज़मीन के नीचे जाकर दिन-रात मेहनत करते हैं। इन्हीं खनिकों का हौसला बढ़ाने और कोयला उद्योग के नवाचारों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्रीय कोयला एवं खान राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने अपने दो दिवसीय एसईसीएल प्रवास के दूसरे दिन बैकुंठपुर क्षेत्र का दौरा किया। मंत्री का स्वागत क्षेत्रीय प्रशासन और प्रबंधन द्वारा पारंपरिक सैला नृत्य के साथ किया गया। उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत चरचा खदान परिसर में वृक्षारोपण किया और पर्यावरण सरोकार का संदेश दिया।

इसके बाद मंत्री श्री दुबे ने चरचा माइन्स में मेन मैकेनिकल वेंटिलेटर (पंखाघर) का उद्घाटन किया, जिससे खनिकों को वेंटिलेशन के जरिए बेहतर और सुरक्षित कार्य वातावरण मिलेगा। साथ ही, महिला कर्मचारियों के लिए बायो-टॉयलेट की सुविधा की शुरुआत कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया।कार्यक्रम में कर्मचारियों व ठेका श्रमिकों का सम्मान, चरचा कैंटीन में कामगारों संग भोजन, और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चिरिमिरी में नई कंटीन्यूअस माइन मशीन का उद्घाटन – यह सभी पहलें मंत्री जी की ज़मीनी जुड़ाव और कार्य संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाती हैं।


अपने संबोधन में श्री दुबे ने कहा: “ज़मीन के नीचे अंधेरे से लड़कर आप जो उजाला लाते हैं, वह भारत को आत्मनिर्भर बना रहा है। आपके श्रम और समर्पण को राष्ट्र नमन करता है।” उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोयला उत्पादन और ऊर्जा क्षेत्र ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं और इसमें एसईसीएल की भूमिका अग्रणी है।

दौरे में एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन, निदेशकगण, बैकुंठपुर विधायक भैयालाल राजवाड़े, कलेक्टर चंदन त्रिपाठी, एसपी रवि कुर्रे, और क्षेत्रीय महाप्रबंधक बीएन झा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


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