विभागीय योजनाओं के लिए निजी मोबाइल का प्रयोग, सुरक्षा की गारंटी नही, स्मार्टफोन व डेटा पैक उपलब्ध कराए बिना ऑनलाइन कार्य करवाना अनुचित

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के निजी मोबाइल अब सरकारी कार्यों के लिए बाध्य हो गए हैं। विभाग द्वारा लगातार नई योजनाओं और ऐप्स के माध्यम से ऑनलाइन कार्य करवाए जा रहे हैं, लेकिन सुरक्षा और संसाधनों की कोई व्यवस्था नहीं है। छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ ने चेताया है कि इससे साइबर फ्रॉड और बैंक धोखाधड़ी का खतरा बढ़ रहा है, और शिक्षकों में विभाग के प्रति आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।
निजी मोबाइल पर विभागीय दबाव :
शिक्षकों को पढ़ाई के बजाय अपने निजी मोबाइल पर ऐप और लिंक के माध्यम से स्कूल से जुड़े रिपोर्टिंग कार्य करने पड़ रहे हैं। विभाग के विभिन्न ऐप जैसे पीएम पोषण, एजुकेशन पोर्टल, दीक्षा ऐप, निष्ठा ऐप, विनोबा ऐप, एमडीएम ऐप, स्वच्छता ऐप आदि को इंस्टाल करने का दबाव है।
ऑनलाइन कार्यों में जोखिम:
शिक्षकों के निजी मोबाइल पर बैंक और व्यक्तिगत जानकारी होने के कारण साइबर फ्रॉड का खतरा बढ़ गया है। कई शिक्षकों ने बताया कि मोबाइल हैंग होने और साइबर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं।
डेटा और संसाधनों की कमी:
कई शिक्षकों के पास पर्याप्त इंटरनेट डेटा नहीं है, और न ही विभाग ने मोबाइल या डेटा पैक प्रदान किया है। इसके बावजूद ऑनलाइन कार्य न करने पर वेतन रोकने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी जाती है।
संघ की मांग:
छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु प्रसाद साहू, प्रदेश संचालक खेमन लाल साहू और प्रदेश सचिव विवेक धुर्वे ने कहा कि शिक्षक निजी मोबाइल में ऐप इंस्टाल करने को तैयार हैं, लेकिन विभाग को प्रत्येक शिक्षक के लिए स्मार्टफोन और पर्याप्त डेटा पैक उपलब्ध कराना चाहिए। निजी मोबाइल को सरकारी मोबाइल बनाने के बजाय निजी ही रहने दिया जाए।
संघ की अपील:
संघ ने छत्तीसगढ़ शासन और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि शिक्षक सुरक्षा, संसाधन और तकनीकी सहायता के बिना ऑनलाइन कार्य करने के लिए बाध्य न हों। सही संसाधन देने से शिक्षा प्रभावित होने और साइबर खतरों को रोका जा सकता है।


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