
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बिलासपुर। स्वच्छता ही सेवा 2025 अभियान के तहत एसईसीएल ने कर्मचारियों और उनके परिवारजनों के स्वास्थ्य संवर्धन के लिए निःशुल्क आयुर्वेदिक न्यूरोथेरेपी और पंचकर्म कैम्प का आयोजन किया। आधुनिक जीवनशैली और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न मानसिक और शारीरिक समस्याओं से बचाव में यह पहल एक ऐतिहासिक कदम है। इस कैम्प के माध्यम से पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ कर्मचारियों का स्वास्थ्य भी सुदृढ़ होगा।
शुभारंभ और प्रमुख उपस्थितियाँ
कैम्प का शुभारंभ निदेशक (मानव संसाधन) के करकमलों से प्रियदर्शिनी क्लब, इंदिरा विहार कॉलोनी, बिलासपुर में हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थितियाँ थीं: डॉ. श्रुतिदेव मिश्रा (प्रमुख चिकित्सा सेवाएँ, एसईसीएल), डॉ. महेन्द्र रघुवंशी (एमडी न्यूरोथेरेपी एवं वात रोग विशेषज्ञ), महाप्रबंधक (कल्याण) श्यामला राव, महाप्रबंधक (सीएसआर) सी.एम. वर्मा, उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन-प्रशासन/जनसंपर्क/राजभाषा) मनीष श्रीवास्तव, प्रबंधक (सिविल) भानु सिंह। उद्घोषणा का दायित्व वरीय प्रबंधक (मानव संसाधन-कल्याण) ने निभाया।

मुख्य अतिथि का संदेश
मुख्य अतिथि ने इस पहल को अत्यंत सराहनीय बताया और कहा कि आधुनिक जीवनशैली और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियाँ अत्यंत प्रभावी हैं। उन्होंने कर्मीगण और उनके परिवारजनों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर इसका लाभ लेने का आव्हान किया।
आयुर्वेदिक न्यूरोथेरेपी और पंचकर्म की विशेषताएँ
डॉ. महेन्द्र रघुवंशी ने उपस्थित लोगों को आयुर्वेदिक न्यूरोथेरेपी और पंचकर्म की विशेषताओं और लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन सेवाओं के माध्यम से:
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा
शरीर से विषैले तत्वों का शुद्धिकरण होगा
दर्द निवारण संभव होगा
जीवनशैली संबंधी रोगों की रोकथाम होगी
प्रदत्त चिकित्सा सेवाएँ
कैम्प में निःशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली चिकित्सा पद्धतियाँ:
न्यूरोथेरेपी उपचार
पंचकर्म चिकित्सा
फायर नीडल थेरेपी
ब्लड कपिंग
लीच थेरेपी
अग्नि कर्म और विद्ध कर्म
स्वास्थ्य और समाज में लाभ
कैम्प में बड़ी संख्या में लाभार्थी, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। यह पहल न केवल कर्मचारियों और उनके परिवारजनों के स्वास्थ्य में योगदान करेगी, बल्कि समाज में पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व को उजागर करने में भी सहायक है।एसईसीएल की यह पहल न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने में भी ऐतिहासिक कदम है।
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