स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल बोले : ये अब इलाज नहीं, रणनीति और जनभागीदारी की लड़ाई है

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘मलेरिया मुक्त राज्य’ की दिशा में अपनी रणनीतिक लड़ाई को और भी तेज़ कर दिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की निगरानी में चल रहा “मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” अब अपने 12वें चरण में निर्णायक मोड़ पर है। 25 जून से जारी इस चरण में राज्य के 10 ज़िलों में लगभग एक लाख लोगों की जांच, 1200 से अधिक संक्रमित मरीजों की तत्काल दवा से इलाज, और मच्छर जनित बीमारियों के प्रति जागरूकता को अभियान का मूल आधार बनाया गया है।
जब नीति, नियत और निगरानी तीनों मिल जाएं, तब ही बनता है असरदार अभियान

बस्तर संभाग में मलेरिया के मामलों में 2015 की तुलना में 71% की कमी, और पूरे राज्य में API (वार्षिक परजीवी सूचकांक) का 27.40 से घटकर 7.11 पर आना, इस बात का प्रमाण है कि सरकार की नीति केवल कागजों में नहीं, ज़मीन पर कारगर है।
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने स्पष्ट कहा –
मलेरिया से जंग अब सिर्फ दवाइयों की नहीं, यह सामाजिक सहभागिता और रणनीतिक संचालन की भी लड़ाई है। हम 2027 तक शून्य मलेरिया और 2030 तक पूर्णतः मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को यथार्थ बना रहे हैं।”
मितानिनों से मलेरिया मुक्ति: जमीनी योद्धाओं का अभूतपूर्व योगदान
अभियान की सफलता में मितानिनें, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम पंचायतें और स्वयंसेवी संगठन एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरे हैं। प्रत्येक मलेरिया पॉजिटिव व्यक्ति को स्थान पर ही दवा की पहली खुराक दी गई, स्थानीय आहार देने के बाद ताकि शरीर पर दवा का असर सुरक्षित रहे।
‘बस्तर मॉडल’ बन सकता है देश के लिए प्रेरणा
डॉ. प्रियंका शुक्ला, आयुक्त सह संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, बताती हैं –
“हमारा फोकस अब ‘लक्षणरहित मलेरिया’ पर है। यानी ऐसे मरीज जो मलेरिया संक्रमित तो हैं, लेकिन बिना लक्षणों के—ऐसे मामलों को पकड़कर रोकना हमारी प्राथमिकता है।” यह मॉडल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय दिशा तय कर रहा है।
सीएम विष्णु देव साय की इच्छाशक्ति का उदाहरण
राज्य सरकार का यह अभियान दर्शाता है कि जब राजनीतिक नेतृत्व, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी एक साथ आती है, तब जनस्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी परिणाम संभव होते हैं।मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़’ सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज और समृद्ध राज्य की ओर एक ठोस, स्थायी और मानवीय पहल है। “जहाँ सरकार केवल घोषणा नहीं, समाधान लेकर आए… वहाँ बीमारी नहीं, बदलाव टिकता है। छत्तीसगढ़ की मलेरिया मुक्ति यात्रा इसका जीता-जागता प्रमाण बन चुकी है।”


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