बालोद में शिक्षा भगवान भरोसे, जर्जर भवन बना खतरे की घंटी
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बालोद/बोहारडीह। जिला बालोद के ग्राम बोहारडीह में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां मात्र दो कमरों में पांच कक्षाओं का संचालन हो रहा है। स्थिति इतनी बदतर है कि एक कक्षा का आधा हिस्सा स्कूल कार्यालय के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्कूल परिसर में मौजूद एक छप्पर वाला भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, जो किसी भी समय गंभीर हादसे को न्योता दे सकता है। बावजूद इसके, बच्चे खेलते-खेलते उस खंडहर जैसी इमारत में पहुंच जाते हैं, जिससे अनहोनी की आशंका बनी रहती है।


10 वर्षों से की जा रही है मांग, फिर भी नहीं मिला भवन
विद्यालय के प्रधान पाठक जितेंद्र कुमार पवार ने बताया कि, “हम लगातार विभाग को जर्जर भवन और कक्षाओं की कमी की जानकारी दे रहे हैं। पिछले 10 वर्षों से व्यवस्थित भवन की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि विद्यालय में मात्र दो कमरे हैं, जिनमें पूरी प्राथमिक शाला संचालित की जा रही है। इनमें से एक कक्षा का आधा हिस्सा कार्यालय के रूप में उपयोग किया जा रहा है, वहीं बाकी जगहों पर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
खतरे में बच्चों का भविष्य और सुरक्षा
जर्जर छप्पर वाला भवन बच्चों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। प्रधान पाठक ने कहा कि उसका एक हिस्सा पहले ही गिर चुका है और अब वह कभी भी पूरी तरह ढह सकता है। यदि भवन को तुरंत डिस्मेंटल या मरम्मत नहीं किया गया, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
नया भवन ही एकमात्र समाधान
विद्यालय प्रशासन की स्पष्ट मांग है कि जल्द से जल्द नए भवन का निर्माण हो, ताकि बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह केवल एक स्कूल की नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा प्रणाली की गंभीर स्थिति का उदाहरण है, जो प्रशासनिक उदासीनता की पोल खोलता है।
बालोद #शिक्षाकीबदहालस्थिति #ग्रामबोहारडीह #जर्जरभवन #प्राथमिकशाला #स्कूलकीदुर्दशा #छत्तीसगढ़शिक्षा #नयाभवननिर्माण #बच्चोंकी_सुरक्षा


About The Author










































