तीरथगढ़ जलप्रपात: हादसों से भी नहीं ले रहे सबक, बच्चों संग खतरनाक स्टंट कर रहे पर्यटक, नहीं दिखी कोई सुरक्षा व्यवस्था

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नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। जगदलपुर। बस्तर की खूबसूरती का प्रतीक माने जाने वाला तीरथगढ़ जलप्रपात पर्यटकों के लिए जितना आकर्षण का केंद्र है, उतना ही अब खतरों से भरा स्थल बनता जा रहा है। हर साल गर्मियों के बाद मॉनसून की दस्तक के साथ ही यहां पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ती है, लेकिन बार-बार होने वाले हादसों के बावजूद पर्यटक न तो सतर्क हो रहे हैं और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिल रही है।

हादसों के बाद भी बेपरवाह पर्यटन

1 जून को ही विशाखापट्टनम से आए एक युवक की तीरथगढ़ जलप्रपात में गिरने से मौत हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद लोग बच्चों सहित झरने में उतरकर फोटो-वीडियो बनाते नजर आ रहे हैं। भारी बारिश के चलते पत्थरों पर फिसलन है, काई जमी हुई है, बावजूद इसके किसी को रोका नहीं जा रहा। लोग पत्थरों पर चढ़कर जान जोखिम में डाल रहे हैं, और दुखद यह कि परिजन छोटे बच्चों को भी उसी खतरे में धकेल रहे हैं।

विशाखापट्टनम के युवक की मौत

1 जून को विशाखापत्तनम से आए 23 सदस्यीय परिवार तीरथगढ़ जलप्रपात पहुंचा था।
परिवार का युवक मेरीवा साईं पवन सात्विक झरने के ऊपरी हिस्से में जाकर सेल्फी और वीडियो बनाने लगा। इस दौरान उसका पैर फिसल गया और वह सीधे नीचे कुंड में गिर गया, जहां उसकी मौत हो गई।

सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं

तीरथगढ़ जलप्रपात तक पहुंचने के लिए तीन अलग-अलग नाकों से गुजरना पड़ता है, जहां पर्यटकों से क्रमशः बाइक, व्यक्ति और सामान के नाम पर फीस वसूली जाती है, लेकिन बदले में कोई सुरक्षा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती।

पहला नाका – गांव की समिति द्वारा ₹20 प्रति बाइक

दूसरा नाका – कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान द्वारा ₹50 प्रति व्यक्ति

तीसरा नाका – सामान जांच और सफाई शुल्क, आंशिक राशि वापस

पर्यटकों को सावधानी के निर्देश, चेतावनी बोर्ड, या गार्ड तक नहीं दिखते।

फिसलन से और बढ़ा खतरा

बारिश के चलते झरने के पास की चट्टानों पर काई जमी हुई है, जिससे वहां चलना बेहद खतरनाक हो गया है। इसके बावजूद पर्यटक, खासकर युवा वर्ग, फोटो और रील्स बनाने के चक्कर में जान जोखिम में डाल रहे हैं।

बच्चों को भी नहीं बख्शा

सबसे चिंताजनक दृश्य तब सामने आते हैं जब परिजन खुद छोटे बच्चों को लेकर पानी में उतरते हैं या पत्थरों पर चढ़ाते हैं। ऐसे में हादसे की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यह लापरवाही मानव जीवन की अनदेखी का खतरनाक उदाहरण है।

सवाल खड़े करती है प्रशासनिक चुप्पी

तीरथगढ़ जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल पर सुरक्षा गार्ड, चेतावनी संकेत, बैरिकेड्स या प्राथमिक चिकित्सा सुविधा तक का अभाव है। हर साल इस झरने में लोग जान गंवाते हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन व वन विभाग की निष्क्रियता ने इस जगह को हादसों का अड्डा बना दिया है। अब समय आ गया है कि प्रशासन जागे, और तीरथगढ़ जलप्रपात जैसे स्थलों पर कठोर सुरक्षा उपाय लागू करे वरना हर साल यहां की खूबसूरती की कीमत किसी की जान से चुकानी पड़ेगी।

जान है तो जहान है
1. सेल्फी से ज़्यादा ज़रूरी है सुरक्षा :
जलप्रपात जैसे खतरनाक क्षेत्रों में फोटो और वीडियो बनाने के लिए जोखिम लेना जानलेवा हो सकता है। एक गलत कदम जीवनभर का पछतावा बन सकता है।

2. बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अभिभावकों की है :
बच्चों को खतरनाक जगहों पर ले जाना लापरवाही नहीं, अपराध की श्रेणी में आना चाहिए। उनकी सुरक्षा से समझौता न करें।

3. प्राकृतिक सौंदर्य का मतलब लापरवाही नहीं :
झरनों, घाटियों और पहाड़ों की खूबसूरती का आनंद जिम्मेदारी से लें। सावधानी और नियमों का पालन करना भी प्रकृति प्रेम का हिस्सा है।

4. प्रशासन को जगाना होगा :
जब शुल्क लिया जा रहा है तो सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए। चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा गार्ड और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था हर पर्यटन स्थल पर अनिवार्य हो।

5. हादसा टाल सकते हैं, अगर पहले से चेत जाएं :
बीते हादसे चेतावनी हैं – अगर अब भी नहीं सुधरे तो अगली बार हादसे का शिकार कोई भी हो सकता है।


याद रखें : खूबसूरत जगहें तभी तक आकर्षक हैं, जब तक वे सुरक्षित हैं। अपने उत्साह को समझदारी की लगाम दें।

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