
मंत्री ने वीडियो में किसानों को दिए खेती के टिप्स
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वे रायगढ़ के बैंग स्थित अपने खेत में जमीन पर बैठकर भोजन कर रहे हैं। चौधरी खाली समय में अक्सर अपने खेतों में काम करते दिखाई देते हैं। वे ‘मोर खेती’ नाम से फेसबुक पर लाइव आते हैं और किसानी के गुर साझा करते हैं। रविवार को शेयर किए गए वीडियो में उन्हें चावल, दाल और भाजी का भोजन करते देखा जा सकता है। भोजन के बाद उन्होंने किसानों को फसलों और पेड़ों को धूप से बचाने के तरीके भी बताए। चौधरी पहले आईएएस अधिकारी थे और राजनीति में आने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। हाल ही में उन्होंने छत्तीसगढ़ का बजट स्वयं हाथ से लिखकर विधानसभा में पेश किया था। यह हस्तलिखित बजट काफी चर्चा में रहा।

पढ़िए वित्तमंत्री ओपी चौधरी की जीवनी
छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी जन्म 2 जून 1981 को हुआ है। वे रायगढ़ जिले की खरसिया ब्लॉक के ग्राम बायंग के रहने वाले है। इनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। जब ओमप्रकाश चौधरी मात्र 8 साल के थे तब उनके पिता का स्वर्गवास हो गया। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। पिता की मौत के बाद उनकी माता कौशल्या ने पेंशन की आय से उनको पाला। ओपी चौधरी ने पांचवीं तक की शिक्षा अपने गांव बायंग के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। फिर आठवी तक की शिक्षा जैमुरी से की। बारहवीं तक सरकारी स्कूलों में पढ़ने के बाद उन्होंने पीईटी उत्तीर्ण की पर वह इंजीनियर ना बन कर आईएएस ही बनना चाहते थे। इसलिए उन्होंने भिलाई से बीएससी किया।
ओपी चौधरी ने यूपीएससी की तैयारी कर अपने पहले ही प्रयास में एग्जाम क्रैक कर लिया। वह मात्र 23 वर्ष की उम्र में ही आईएएस अफसर बन गए थे। ओपी चौधरी 2005 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अफसर थे। पहली पोस्टिंग सहायक कलेक्टर के तौर पर 2006 में कोरबा में हुई। इसके बाद 2007 में उन्हें रायपुर में एसडीएम बनाया गया। 2007 में उन्हें जांजगीर जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया। वे राजधानी रायपुर के नगर निगम कमिश्नर भी रहे। साल 2011 में उन्हें दंतेवाड़ा में कलेक्टर के तौर पर पदस्थ किया गया। रायपुर कलेक्टर भी ओपी चौधरी रहे।
दंतेवाड़ा कलेक्टर के पद पर रहते हुए इन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को विज्ञान की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही इंजीनियरिंग तथा मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग की सुविधा के साथ आवासीय स्कूल की शुरुआत की। चौधरी ने गीदम ब्लॉक में स्थित एक छोटे से गांव, जावंगा को 2011 में शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया। चौधरी ने जिले में लाइवलीहुड कॉलेज की भी शुरुआत की, जिसे बाद में पूरे राज्य में लागू किया गया। 2011-12 में बेहतर काम के लिए उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा एक्सीलेंस अवार्ड से भी नवाज़ा गया।
डॉक्टर अदिति पटेल से उनका विवाह हुआ है। 13 साल की सर्विस के बाद उन्होंने 2018 में आईएएस की सर्विस से इस्तीफा देकर भाजपा में प्रवेश कर लिया। उन्होंने भाजपा की टिकट से खरसिया से विधानसभा चुनाव लड़ा पर उमेश पटेल से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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