पोषण पर सख्ती, लापरवाही पर चेतावनी, कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए सख्त निर्देश

नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरिया। जिले की कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने शुक्रवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने विभागीय कार्यों की गंभीर समीक्षा करते हुए अधिकारियों और सुपरवाइजरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। कलेक्टर ने कहा, “पोषण की कमी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और इसका असर जमीनी स्तर पर साफ नजर आना चाहिए।” उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग, समय पर खुलने, स्वच्छता और सेवाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

जर्जर भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर तत्काल एक्शन
कलेक्टर त्रिपाठी ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं चलने चाहिए। ऐसे केंद्रों को तुरंत बंद कर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए या प्रशासन को तत्काल जानकारी दी जाए।
सुपरवाइजरों को मिली जिम्मेदारी और चेतावनी

उन्होंने सुपरवाइजरों को ईमानदारी और जवाबदेही के साथ कार्य करने की हिदायत देते हुए कहा कि आंगनबाड़ी का संचालन, निरीक्षण और मॉनिटरिंग उनकी सीधी जिम्मेदारी है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
पोषण दीदियों से समन्वय और कोरिया मोदक वितरण में पारदर्शिता के निर्देश
कलेक्टर ने “कोरिया मोदक” योजना के तहत पोषण दीदियों के साथ समन्वय बनाए रखने और लाभार्थियों तक पौष्टिक सामग्री समय पर पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
धरती आबा अभियान के तहत जनजातीय बच्चों का पंजीयन प्राथमिकता में

बैठक में ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के अंतर्गत आधार कार्ड और जाति प्रमाण-पत्र पंजीयन शिविरों की प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सभी पात्र जनजातीय बच्चों का पंजीयन समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। इस समीक्षा बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी जे.आर. प्रधान, स्वास्थ्य विभाग, एनआरएलएम एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कलेक्टर त्रिपाठी की यह बैठक न केवल कार्य की समीक्षा थी, बल्कि सुधार के संकेत और ज़मीनी सख्ती की तैयारी भी थी – ताकि शासन की योजनाएं सिर्फ कागज़ों में नहीं, लाभार्थियों की थाली तक पहुंचें।


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