स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश का बड़ा असर नशीली दवाओं पर शिकंजा : 25 मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निरस्त

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नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। रायपुर। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के निर्देश पर प्रदेश में नशीली दवाइयों के अवैध व्यापार पर लगाम कसने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन छत्तीसगढ़ द्वारा राज्यभर में सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस विभाग के सहयोग से औषधि निरीक्षकों ने संदेहास्पद मेडिकल स्टोरों पर संयुक्त छापामार कार्रवाई की है। इस विशेष अभियान में नारकोटिक दवाओं की बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड, बिलिंग सिस्टम और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की गई। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत अनियमितता पाए जाने पर 25 मेडिकल स्टोरों की अनुज्ञप्तियां निलंबित या निरस्त कर दी गई हैं। बीते दो महीनों में प्रशासन ने कुल 2920 मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया, जबकि नेशनल नारकोटिक्स कॉर्डिनेशन (‘नकॉर्ड’) की राज्य स्तरीय बैठक के निर्देशानुसार 3610 मेडिकल संस्थानों के सीसीटीवी फुटेज भी जांचे गए। इस दौरान कई संस्थानों में नियमों की अनदेखी सामने आई।

ब्लड सेंटर्स होंगे पूरी तरह डिजिटल
भारत सरकार के निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ के सभी 144 ब्लड सेंटर्स को ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकृत किया जा रहा है। भविष्य में इन सेंटर्स से जुड़ी समस्त प्रक्रियाएं — जैसे पंजीयन, लाइसेंस और दस्तावेजी कार्य — केवल ऑनलाइन माध्यम से ही होंगी।

ब्लड सेंटर्स को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं और पंजीयन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। यह पहल पारदर्शिता और समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


खबर से सबक
इस खबर से जनता, मेडिकल व्यवसायियों और प्रशासन—तीनों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सबक निकलते हैं:

जनता के लिए सबक :
बिना पर्ची के दवाएं न खरीदें, खासकर नशीली या मानसिक रोगों से जुड़ी दवाएं।

मेडिकल स्टोर की विश्वसनीयता जांचें—अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) प्रदर्शित होनी चाहिए।

संशय होने पर शिकायत करें, ताकि अवैध बिक्री पर रोक लगाई जा सके।

मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए सबक :
नियमों का पालन करें, विशेष रूप से नारकोटिक दवाओं की बिक्री और रिकॉर्ड कीपिंग में।

सीसीटीवी कैमरे और बिलिंग सिस्टम पारदर्शी रखें।

अनियमितता मिलने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है, जिससे व्यवसाय ही समाप्त हो सकता है।

प्रशासन के लिए सबक :
ऐसे निरीक्षण नियमित रूप से जारी रखें, ताकि कानून का भय बना रहे।

तकनीक (CCTV, ऑनलाइन पोर्टल) का सही उपयोग करके निगरानी मजबूत करें।

ब्लड सेंटर्स जैसे संस्थानों में डिजिटलीकरण से पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है।

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