
राजनांदगांव में अवैध रेत खनन पर बड़ी कार्रवाई, प्रशासनिक लापरवाही पर त्वरित फैसला
नई पहल न्यूज़ नेटवर्क । रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने अवैध रेत खनन पर नियंत्रण में विफल रहने वाले राजनांदगांव जिले के खनिज अधिकारी प्रवीण चन्द्राकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। राज्य शासन के खनिज साधन विभाग द्वारा यह कार्रवाई 15 जून को आचरण नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई। यह आदेश छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 की धारा 3(1) एवं 3(2) के उल्लंघन के तहत जारी किया गया है, जिसमें अधिकारी के कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही सिद्ध हुई है।

क्या है आदेश में ?
राज्य शासन द्वारा महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी आदेश में लिखा गया है कि, “प्रवीण चन्द्राकर, जिला खनिज अधिकारी द्वारा राजनांदगांव जिले में खनिज रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के प्रकरणों में प्रभावी नियंत्रण तथा समुचित कार्रवाई नहीं की गई है। उनका यह आचरण सेवा नियमों का उल्लंघन है।” शासन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए, श्री चन्द्राकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए, उनका मुख्यालय संचालनालय भूविज्ञान तथा खनिकर्म, रायपुर तय किया है। निलंबन की अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता दी गई है।
चंद्राकर के संरक्षण से ऐसे पनपा रेत माफिया
राजनांदगांव जिले में बीते कुछ महीनों से अवैध रेत खनन, ओवरलोडिंग और रॉयल्टी चोरी की गतिविधियां सुर्खियों में थीं।
ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय मीडियाकर्मियों ने प्रशासन को बार-बार सूचित किया था कि नदियों से बिना अनुमति के मशीनों से रेत निकाली जा रही है।
इन गतिविधियों में ट्रैक्टर-ट्रक से ओवरलोड परिवहन, रात के समय संचालन, और स्थानीय अधिकारियों की चुप्पी चर्चा में रही।
सूत्रों की मानें तो खनिज अधिकारी प्रवीण चन्द्राकर पर आरोप था कि वे इन गतिविधियों को जानते हुए भी कार्रवाई से बचते रहे। यही कारण रहा कि शासन ने अब कड़ा कदम उठाया।
निलंबन से मिलते है यह संकेत
प्रशासनिक सख्ती छत्तीसगढ़ शासन अब “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति पर दिख रहा है।
नैतिक जवाबदेही यदि कोई अधिकारी जनता के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा नहीं कर सकता, तो उसके खिलाफ त्वरित कार्रवाई जरूरी है।
खनन क्षेत्र में संदेश अब अवैध उत्खनन और मिलीभगत किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


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