
नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। जशपुर। जहां एक ओर देशभर में बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य की बात हो रही थी, वहीं जशपुर जिले के लाखझर गांव से एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आई, जिसने समाज की संवेदनहीनता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
बच्चा नाबालिग, दोष सिद्ध नहीं, फिर भी भीषण सजा !

घटना पत्थलगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत लाखझर गांव की है, जहां एक किसान करमु राम ने एक नाबालिग बालक को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या प्रमाण के अपने खेत में नुकसान पहुंचाने और पुआल जलाने का आरोप लगाते हुए दिनदहाड़े पेड़ से बांधा और डंडों से बेरहमी से पीटा। बच्चे को इस कदर पीटा गया कि वह बुरी तरह से घायल हो गया। कई घंटों तक वह उसी हालत में पेड़ से बंधा हुआ पड़ा रहा। हैरानी की बात यह रही कि करमु राम ने इस क्रूरता की तस्वीरें पंचायत विकास समिति नामक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा भी कीं।

परिजनों को मिली जानकारी, बच्चा अस्पताल में भर्ती
बच्चे के परिजनों को जैसे ही घटना की सूचना मिली, वे मौके पर पहुंचे और उसे छुड़ाया। उन्होंने स्थिति को शांत करने के लिए आरोपी से नुकसान की भरपाई का वादा किया।
गंभीर रूप से घायल बच्चे को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
बाल अधिकारों का खुला उल्लंघन, प्रशासन मौन क्यों ?
यह घटना केवल एक मारपीट नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और बाल संरक्षण कानूनों का सीधा उल्लंघन है। बाल संरक्षण अधिनियम, 2005 (POCSO), किशोर न्याय अधिनियम और मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत यह कृत्य गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और बाल संरक्षण विशेषज्ञों की राय:
“इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूकता की घोर कमी है। अगर ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समाज में दहशत पैदा करेगा और बच्चों के मन में कानून के प्रति अविश्वास।”
बाल श्रम निषेध दिवस पर आत्मचिंतन जरूरी
एक ओर देश भर में बच्चे स्कूल, बाल मेले और जागरूकता रैलियों में भाग ले रहे थे, वहीं दूसरी ओर एक मासूम शारीरिक यातना और सार्वजनिक अपमान झेल रहा था।
यह घटना सिर्फ एक निंदनीय अपराध नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक असंवेदनशीलता और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है।
हमारी ज़िम्मेदारी क्या है ?
प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर FIR दर्ज करनी चाहिए।
आरोपी करमु राम को IPC की संगीन धाराओं में गिरफ्तार किया जाए।
पीड़ित परिवार को न्यायिक सहायता, मुआवजा और परामर्श सेवा दी जानी चाहिए।
पंचायत स्तर पर बाल अधिकारों को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए।

बाल श्रम निषेध दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक प्रतिबद्धता है। उन बच्चों के लिए जो आज भी अन्याय, हिंसा और उपेक्षा का शिकार बन रहे हैं।
यदि ऐसी घटनाओं पर हम मौन रह गए, तो यह केवल एक बच्चे की हार नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक पराजय होगी।


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