कानून भागता रहा, पुलक चढ़ता रहा : फरार आरोपी बना छत्तीसगढ़ का एडिशनल कलेक्टर !

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों से एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है, जिसने सिस्टम की जड़ें हिला दी हैं। एक ऐसा शख्स, जिसे अदालत ने वर्ष 2015 में स्थायी वारंटी घोषित किया, वह न केवल नौकरी में बना रहा, बल्कि तहसीलदार से शुरू कर एडिशनल कलेक्टर तक की पदोन्नति की सीढ़ियां भी चढ़ता गया। आरोपी का नाम है पुलक भट्टाचार्य, पिता राम भट्टाचार्य, निवासी महासमुंद, जिसे अदालत ने वर्ष 1990 में हुए आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान और अराजकता फैलाने के गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी बनाया था। मामले में FIR दर्ज हुई, लेकिन पुलक भट्टाचार्य फरार हो गया और वर्ष 2015 में न्यायालय ने उसे स्थायी रूप से भगोड़ा घोषित कर दिया। लेकिन इसके बावजूद, वर्ष 1996 में वह तहसीलदार के रूप में सरकारी सेवा में भर्ती हो गया। वर्षों तक बिना किसी पुलिस जांच या सत्यापन के नौकरी करता रहा। यही नहीं, वह डिप्टी कलेक्टर बना और बाद में राजनीति के संरक्षण में एडिशनल कलेक्टर के पद तक पहुंच गया।

सामान्य प्रशासन विभाग को की गई शिकायत

अब एक नई शिकायत में पुलक भट्टाचार्य को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि रायपुर में ADM रहते हुए उन्होंने करीब 60 करोड़ रुपये मूल्य की बेशकीमती सरकारी जमीन एक भू-माफिया के नाम नामांतरित कर दी, वो भी बिना रजिस्ट्री के—सिर्फ एग्रीमेंट के आधार पर। इससे छत्तीसगढ़ शासन को करीब 7 करोड़ रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं, शिकायतों के अनुसार, पुलक भट्टाचार्य पर भू-माफियाओं से साठ-गांठ, जमीनों की नाप-जोख में गड़बड़ी, टैक्स चोरी और पद के दुरुपयोग के आरोप हैं। राजधानी रायपुर और आसपास की अचल संपत्तियों के विवादों में उनका नाम आम हो चुका है।
फरारी की जानकारी छुपाई गई
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए फरारी की अवधि छुपाकर झूठी जानकारी दी गई, और पुलिस वेरिफिकेशन दस्तावेजों में भारी गड़बड़ियां की गईं। अब मांग की जा रही है कि पूरे मामले की ACB, EOW या ED जैसी एजेंसियों से जांच कराई जाए।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पुलक भट्टाचार्य को पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर का करीबी बताया जाता है, जिनकी सिफारिश पर उन्हें ट्रांसपोर्ट कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी नियुक्त किया गया। अकबर एंड कंपनी के रियल एस्टेट नेटवर्क में भी ADM भट्टाचार्य की भूमिका को “कड़ी” बताया गया है। इतना कुछ सामने आने के बाद भी, न तो उन्हें गिरफ्तार किया गया और न ही उनके खिलाफ कोई ठोस विभागीय कार्रवाई शुरू हुई है।
अब सवाल उठता है —
“क्या छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक गठजोड़ इतने मजबूत हैं कि 30 साल से फरार व्यक्ति आराम से अधिकारी बनकर जनता की सेवा का नाटक करता रहा?”
या “क्या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?” ये खबर प्रशासनिक पारदर्शिता, पुलिस व्यवस्था और राजनीतिक दखल के त्रिकोण में जकड़े छत्तीसगढ़ की उस हकीकत को उजागर करती है, जिसे जानना हर जागरूक नागरिक का अधिकार है।
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