छत्तीसगढ़ के दो युवाओं ने साइकिल से की 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की यात्रा, 10 महीने में तय किए 13 राज्यों के तीर्थ
नई पहल न्यूज नेटवर्क। अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के दो युवाओं ने साहस, श्रद्धा और संकल्प की मिसाल पेश करते हुए सिर्फ साइकिल के सहारे 12 ज्योतिर्लिंग और चारधाम की यात्रा पूरी कर ली। लगभग 10 महीनों तक लगातार 13 राज्यों में यात्रा कर, तीर्थों के दर्शन कर ये दोनों अब अमरकंटक के अंतिम पड़ाव से अपने गृहग्राम सरगुजा की ओर रवाना हो चुके हैं।


इस प्रेरणास्पद यात्रा के नायक हैं —
नूदा दानेश्वर यादव, ग्राम जमदई, जिला सूरजपुर
प्रवीण कुमार यादव, मैनपाट, जिला सरगुजा
दोनों आपस में मामा-बुआ के बेटे हैं। इन्होंने साइकिल से देश के 12 ज्योतिर्लिंग, चारधाम, शक्तिपीठ, सिद्धपीठ, और नेपाल स्थित बाबा पशुपतिनाथ समेत अनेक तीर्थ स्थलों का भ्रमण कर सनातन परंपरा की सच्ची सेवा की है।
कब और कैसे शुरू की यात्रा ?
29 सितंबर 2024 को सूरजपुर से निकले ये दोनो श्रद्धालु बाबा के बुलावे पर निकले थे।
प्रवीण यादव बताते हैं कि ,“हमने तिरंगा झंडा साथ लेकर यात्रा शुरू की, जो हमारे देश की पहचान है। यह यात्रा सनातन धर्म के प्रचार और आंतरिक शांति की खोज के लिए थी।”
किस-किस तीर्थ का दर्शन किया ?
इन दोनों युवाओं ने अपनी यात्रा में प्रमुख रूप से दर्शन किए:
12 ज्योतिर्लिंग: ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, सोमनाथ, नागेश्वर, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, बैद्यनाथ, मल्लिकार्जुन, रामेश्वरम, केदारनाथ, और ग्रिश्नेश्वर
चारधाम: बद्रीनाथ, केदारनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम
अन्य स्थल: अयोध्या, हरिद्वार, ऋषिकेश, तिरुपति बालाजी, द्वारकाधीश, नीम करोली बाबा, विंध्याचल, अमरकंटक, पशुपतिनाथ (नेपाल)
यात्रा के पीछे उद्देश्य और अनुभव
दानेश्वर यादव ने बताया: “प्रकृति की गोद में रहकर यात्रा करना हमारे लिए जीवन का सबसे बड़ा अनुभव रहा। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग लोगों से मुलाकात हुई, हर जगह हमें अपार स्नेह और सहयोग मिला।”
उनका कहना है कि साइकिल यात्रा से भारत को जानने और महसूस करने का अनुभव मिला।
संघर्ष में छुपी साधना
❖ लंबी यात्रा, सीमित संसाधन, अनजान रास्ते — फिर भी इन युवाओं का मनोबल कभी नहीं टूटा।
❖ कई बार बारिश, गर्मी, कठिन चढ़ाइयाँ आईं, लेकिन श्रद्धा और उद्देश्य ने कभी पीछे मुड़ने नहीं दिया।
जब आधुनिक दुनिया में लोग तीर्थ यात्रा के लिए उड़ानों और वाहनों पर निर्भर हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के इन दो युवाओं ने साइकिल से यात्रा करके अपने इरादों और श्रद्धा की गहराई दिखा दी। इनका यह प्रयास ना केवल सनातन संस्कृति का प्रचार है, बल्कि आज की पीढ़ी को संकल्प, संयम और संस्कार की सीख भी देता है।
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