The specified slider id does not exist.

हसदेव को बचाने की बड़ी मुहिम : पूर्व डिप्टी CM टी.एस. सिंह देव ने खटखटाया FAC का दरवाजा, 7 लाख पेड़ों और रामगढ़ की गुफाओं पर संकट

Share this post:

‘हसदेव बचाओ’ आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार : सिंह देव ने दस्तावेजों के साथ वन सलाहकार समिति से की केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को रद्द करने की मांग

अम्बिकापुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के फेफड़े कहे जाने वाले हसदेव अरण्य को बचाने के लिए पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने एक निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। आज नई दिल्ली में केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) की अहम बैठक के बीच, सिंह देव ने सदस्यों से सीधा संवाद कर केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की वन स्वीकृति को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की पुरजोर मांग की है।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस खदान को मंजूरी मिली, तो न केवल 7 लाख पेड़ धराशायी होंगे, बल्कि छत्तीसगढ़ का गौरव कही जाने वाली रामगढ़ की प्राचीन गुफाएं और मंदिर भी जमींदोज हो सकते हैं।

ऐतिहासिक रामगढ़ पर खतरा: “दूरी छिपाने का खेल”

​पूर्व उपमुख्यमंत्री ने दस्तावेजों के माध्यम से खुलासा किया कि रिपोर्ट में खनन स्थल से रामगढ़ पहाड़ियों की दूरी को गलत तरीके से पेश किया गया है।

  • सच्चाई: पहाड़ी की वास्तविक एरियल दूरी मात्र 8 किलोमीटर है।
  • हेराफेरी: रिपोर्ट में इसे जानबूझकर 10 किलोमीटर से अधिक दिखाया गया है, क्योंकि मापन पहाड़ी के निकटतम छोर के बजाय सबसे दूर वाले छोर से किया गया।
  • प्रभाव: सिंह देव ने स्पष्ट किया कि वर्तमान खनन गतिविधियों के कारण ऐतिहासिक रामगढ़ की पहाड़ियों में पहले ही दरारें आ चुकी हैं। यदि केते एक्सटेंशन शुरू हुआ, तो ASI द्वारा संरक्षित ये प्राचीन स्मारक हमेशा के लिए नष्ट हो जाएंगे।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट को किया गया दरकिनार

​सिंह देव ने FAC को याद दिलाया कि देश के शीर्ष संस्थानों ने इस क्षेत्र में खनन को आत्मघाती बताया है:

  1. WII (भारतीय वन्यजीव संस्थान): 2021 की रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की गई थी कि PEKB-I के अलावा शेष सभी नए क्षेत्रों को ‘नो गो एरिया’ घोषित किया जाए।
  2. ICFRE की चेतावनी: ‘चोरनाई वाटरशेड’, जो हसदेव नदी का मुख्य जलग्रहण क्षेत्र है, उसका 90% हिस्सा इसी कोल ब्लॉक में आता है। यहाँ खनन होने से बांगो जलाशय और हसदेव नदी का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।

“कोयले की जरूरत ही नहीं, फिर विनाश क्यों ?”

​सिंह देव ने राज्य सरकार और केंद्र के तर्कों को काटते हुए छत्तीसगढ़ वन विभाग के उस हलफनामे (Affidavit) का हवाला दिया, जो सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया था।

​”मौजूदा PEKB माइन में अब भी 350 मिलियन टन कोयला शेष है, जो अगले 20 वर्षों तक बिजली संयंत्रों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में नए वन क्षेत्रों को उजाड़ने का कोई तार्किक आधार नहीं है।”

हाथियों का घर बनेगा रेगिस्तान

​यह क्षेत्र लेमरू हाथी अभ्यारण्य का बफर जोन है। सिंह देव ने चिंता जताई कि 2014 के बाद से इस इलाके में हाथी-मानव द्वंद्व की घटनाएं बढ़ी हैं। अगर 1,742 हेक्टेयर के इस घने जंगल को काटा गया, तो छत्तीसगढ़ का यह समृद्ध इलाका रेगिस्तान में तब्दील हो जाएगा।

निर्णायक अपील

​सिंह देव ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजे गए दस्तावेजों की प्रतियां भी समिति को सौंपी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि FAC केवल व्यावसायिक हितों को न देखकर छत्तीसगढ़ की जैव विविधता, हसदेव नदी और ऐतिहासिक रामगढ़ के अस्तित्व को बचाने के लिए इस कोल ब्लॉक की स्वीकृति को खारिज करेगी।

यह खबर छत्तीसगढ़ के पर्यावरण और विरासत संरक्षण की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें केंद्र और राज्य के पर्यावरण मानकों की पारदर्शिता पर सीधे सवाल उठाए गए हैं।

About The Author

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

खबरें और भी हैं...

Advertisement Box

RO No. 13820/1

लाइव क्रिकट स्कोर

Gold and Silver price

मौसम अपडेट

राशिफल

© 2026 Nayi Pahal News  – All rights reserved. | News Website Development Services | New Traffic tail