कलेक्टर का ‘ऑन द स्पॉट’ एक्शन : प्रेमनगर में औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप, आश्रम-आंगनबाड़ी में लापरवाही पर थमाए नोटिस

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कलेक्टर रेना जमील का औचक निरीक्षण: प्रेमनगर में खुली दावों की पोल; गंदगी, कम उपस्थिति और घटिया निर्माण पर गिरी गाज

नई पहल न्यूज नेटवर्क। सूरजपुर/प्रेमनगर: सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विकासखंड में कलेक्टर रेना जमील ने औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक अमले की नींद उड़ा दी। निरीक्षण के दौरान आदिवासी बालक आश्रम से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों तक अव्यवस्थाओं, घटिया निर्माण और गंभीर लापरवाही का आलम देखने को मिला। बच्चों के पोषण, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं में खिलवाड़ देखकर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया और संबंधित अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई।

​आदिवासी बालक आश्रम में बदहाली: गंदगी और अव्यवस्था पर कलेक्टर की कड़ी नाराजगी

​कलेक्टर रेना जमील जब आदिवासी बालक आश्रम पहुंचीं, तो वहां साफ-सफाई और रखरखाव की स्थिति बेहद दयनीय मिली। बच्चों के रहने और खाने-पीने के स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव पाया गया। इस भारी बदहाली को देखकर कलेक्टर ने मौके पर ही मौजूद स्टाफ पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

जब ‘टीचर’ बनीं कलेक्टर: खेल-खेल में बच्चों से पूछी बारहखड़ी और अंग्रेजी अल्फाबेट

आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण के दौरान बच्चों की कम उपस्थिति पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने केवल आंकड़ों पर भरोसा न करते हुए स्वयं बच्चों की सीखने की क्षमता को परखा। कलेक्टर ने बेहद दोस्ताना अंदाज में बच्चों से खेल-खेल में हिंदी की बारहखड़ी और अंग्रेजी वर्णमाला सुनकर उनकी शिक्षा का स्तर जांचा।

​नवनिर्मित भवन में घटिया निर्माण: लीपापोती पर गिरी गाज

​निरीक्षण के दौरान नवनिर्मित आंगनबाड़ी भवन की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। पहली ही नजर में निर्माण कार्य में की गई धांधली और लीपापोती उजागर हो गई। कलेक्टर ने निर्माण में गुणवत्ता की कमी पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी राशि के दुरुपयोग और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​गाज गिरना तय: जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी

​कार्रवाई के मूड में आईं कलेक्टर रेना जमील ने मौके पर ही लापरवाही तय करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करने के निर्देश दिए।

​इन पर गिरेगी गाज:

  • ​मंडल संयोजक (आश्रम में अव्यवस्था के लिए)
  • ​सीडीपीओ एवं सुपरवाइजर (कम उपस्थिति व मॉनिटरिंग में ढिलाई के लिए)
  • ​निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर व ठेकेदार (घटिया निर्माण के लिए)

​कड़ा संदेश: शिक्षा और पोषण में लापरवाही पड़ी तो खैर नहीं

​कलेक्टर ने सख्त लहजे में हिदायत दी है कि बच्चों की शिक्षा, सेहत और पोषण से जुड़ा कोई भी काम प्राथमिकता पर होना चाहिए। यदि भविष्य में प्रेमनगर या जिले के किसी भी क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही दोबारा पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधी निलंबन और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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