– छत्तीसगढ़ के तीसरी से आठवीं तक के नौनिहालों के गढ़ रहे भविष्य, लोक संस्कृति और संस्कारों को पाठ्यपुस्तकों में मिल रही है नई उड़ान
– डी.ए.वी. स्कूल की शिक्षिका व साहित्यकार की लेखनी ने बच्चों के लिए पढ़ाई को बनाया आनंददायक और ज्ञानवर्धक
नई पहल न्यूज नेटवर्क। चिरमिरी: कोयलांचल नगरी चिरमिरी ने अब शैक्षिक पटल पर भी अपनी एक स्वर्णिल और अमिट छाप छोड़ दी है। छत्तीसगढ़ शासन की सर्वोच्च शैक्षिक संस्था एस.सी.ई.आर.टी. (SCERT) रायपुर द्वारा प्रदेश के कक्षा तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई बहुप्रतीक्षित ‘सहायक वाचन’ पुस्तक श्रृंखला में चिरमिरी की प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल की हिंदी शिक्षिका मल्लिका रुद्रा ने अपनी लेखनी का अहम योगदान दिया है। उनकी इस गौरवशाली सहभागिता से न केवल चिरमिरी अंचल बल्कि पूरे शिक्षा जगत का मान बढ़ गया है।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत हैं पुस्तकें: यह श्रृंखला वर्तमान में प्रदेश के समस्त शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा बन चुकी है, जिससे लाखों बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।
- लोक संस्कृति और परंपराओं का अनूठा संगम: नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप तैयार इन पुस्तकों में छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, स्थानीय परिवेश, लोक जीवन और परंपराओं को बेहद सहजता से पिरोया गया है।
- ज्ञान और संस्कारों का अनमोल गुलदस्ता: कहानियों, कविताओं और संवादों के माध्यम से बच्चों में भाषागत दक्षता, नैतिक मूल्य, संवेदनशीलता और सृजनात्मक अभिव्यक्ति का विकास करना इन पुस्तकों का मुख्य उद्देश्य है।
- रचनात्मक मूल्यांकन व आत्मविश्वास: बच्चों में स्वयं पढ़ने, सोचने और स्वतंत्र रूप से विचार व्यक्त करने की आदत विकसित करने के लिए पाठों के अंत में खुले विकल्प वाले प्रश्न जोड़े गए हैं।
विशेषज्ञों का मिला-जुला प्रयास:
इस महत्वपूर्ण लेखन कार्य में मल्लिका रुद्रा के साथ-साथ प्रदेश के अन्य प्रतिष्ठित रचनाकारों—बलदाऊ राम साहू, विनय शरण सिंह, श्याम नारायण श्रीवास्तव, पोखन लाल जायसवाल, द्रोण साहू और प्रिया जोशी ने भी अपनी सक्रिय और सराहनीय भागीदारी दर्ज कराई है।
शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि:
मल्लिका रुद्रा के दीर्घकालिक साहित्यिक अनुभवों और उत्कृष्ट शिक्षण कौशल ने इन पाठ्यपुस्तकों को बच्चों के लिए बेहद रोचक, सुबोध और उपयोगी बना दिया है। उनकी लेखनी ने बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को एक आनंददायक सफर में तब्दील कर दिया है।

आने वाले समय में यह सहायक वाचन पुस्तकें छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के लिए ज्ञान, संस्कार और सर्वांगीण विकास का एक अमूल्य स्रोत सिद्ध होंगी, और चिरमिरी के शैक्षिक इतिहास में मल्लिका रुद्रा का यह योगदान हमेशा-हमेशा के लिए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।
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