भाजपा नेता तपन मुखर्जी की पत्नी विजया मुखर्जी का निधन, रूढ़ियों को तोड़ बेटी ने निभाया पुत्र का धर्म
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। समाज में बेटियों की शक्ति और उनके बदलते स्वरूप की एक बेहद भावुक तस्वीर आज मनेंद्रगढ़ के आमाखेरवा मुक्तिधाम में देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल अध्यक्ष तपन मुखर्जी की धर्मपत्नी विजया मुखर्जी के निधन के पश्चात, उनकी सुपुत्री ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म निभाई। इस दृश्य को देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं और समाज को एक नई दिशा देने वाले इस साहसी कदम की चर्चा पूरे क्षेत्र में रही।

लंबे संघर्ष के बाद ली अंतिम सांस
विजया मुखर्जी पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके उपचार के लिए परिवार ने हर संभव प्रयास किए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनके निधन की खबर से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। उनकी अंतिम यात्रा टीवी टावर रोड स्थित उनके निवास स्थान से निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
पुत्र नहीं तो क्या? बेटी ही बनी ‘श्रवण कुमार’
तपन मुखर्जी का कोई पुत्र नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों को हमेशा बेटों के समान ही संस्कार और साहस दिया। हिंदू परंपराओं में अक्सर पुत्र द्वारा ही मुखाग्नि देने का प्रचलन रहा है, परंतु आज की बदलती परिस्थितियों में बेटियों ने इस रूढ़ि को पीछे छोड़ दिया है। विजया जी की बेटी ने जलती हुई मशाल थामी और अपनी माँ की देह को पंचतत्व में विलीन किया।
भावुक कर देने वाला पल
मुक्तिधाम में जब बेटी ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की, तो वहां उपस्थित लोगों ने इसे ‘समानता’ और ‘संस्कारों’ की जीत बताया। लोगों का कहना था कि “बेटियां केवल घर की लक्ष्मी नहीं होतीं, बल्कि संकट और कर्तव्य के समय वे कुल का मान बढ़ाने वाला बेटा भी बन सकती हैं।”







