बड़ा झोल : जनकपुर-सीधी हाईवे पर लगा ‘भ्रम सूचक’ बोर्ड, मध्य प्रदेश का जिला मुख्यालय समझकर छत्तीसगढ़ के गांव पहुंच रहे मुसाफ़िर, विभाग तान कर सोया चादर
नई पहल न्यूज नेटवर्क। जनकपुर। विज्ञान और तकनीक की दुनिया में दूरियां मिटाने के दावे तो बहुत सुने होंगे, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) ने जो कर दिखाया है, वैसा चमत्कार शायद ही कहीं देखने को मिले। जनकपुर से होकर जिला सीधी (मध्य प्रदेश) की ओर जाने वाले स्टेट हाईवे पर इन दिनों एक ऐसा ‘जादुई’ दिशा सूचक बोर्ड लगा है, जो विज्ञान के सारे नियमों को चुनौती दे रहा है। इस बोर्ड पर लिखा है— “सिंगरौली म.प्र. 3 किलोमीटर”। इस एक लाइन ने राहगीरों का वो भूगोल बिगाड़ा है कि लोग अब हाईवे पर सफर करने से पहले भगवान को याद कर रहे हैं।
दूरी 150 किलोमीटर, बोर्ड पर सिर्फ 3 किमी का ‘शॉर्टकट’
दरअसल, हकीकत यह है कि इस मोड़ से मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध औद्योगिक शहर और जिला मुख्यालय सिंगरौली की वास्तविक दूरी लगभग 150 किलोमीटर है। लेकिन PWD के किसी ‘दूरदर्शी’ कारिंदे ने इसे महज 3 किलोमीटर में समेट दिया। बाहर से आने वाले वाहन चालक और यात्री इसे मध्य प्रदेश के सिंगरौली शहर का रास्ता समझकर मुड़ जाते हैं, और ठीक 3 किलोमीटर बाद उनका सामना मध्य प्रदेश के चमचमाते शहर से नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के एक छोटे से शांत गांव ‘सिंगरौली’ से होता है।

शहर की चाह में गांव पहुंच रहे मुसाफ़िर, समय और ईंधन की बर्बादी
इस हाईवे पर रोजाना सैकड़ों भारी वाहन और राहगीर जिला सीधी और सिंगरौली के लिए आवागमन करते हैं। रात के वक्त स्थिति और बदतर हो जाती है। अनजान ड्राइवर इस बोर्ड के झांसे में आकर छत्तीसगढ़ की सीमा के भीतर दाखिल हो जाते हैं। जब तक उन्हें अपनी गलती का अहसास होता है, तब तक उनका कीमती समय, डीजल और सब्र… तीनों जवाब दे चुके होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ‘भ्रम सूचक’ बोर्ड कोई नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से इसी तरह सीना ताने खड़ा है।
अफ़सरों की कुंभकरणी नींद: नाम एक, तो क्या भूगोल भी एक ?
स्थानीय नागरिकों ने कई बार इस गंभीर लापरवाही की ओर लोक निर्माण विभाग का ध्यान आकर्षित कराया है, लेकिन साहब! सरकारी दफ्तरों में फाइलें जितनी धीमी चलती हैं, शायद विभाग को लगता है कि गाड़ियां भी उतनी ही धीमी चलती होंगी। अफ़सरों की इस लापरवाही पर अब जनता चुटकी ले रही है कि ‘शायद इंजीनियर साहब को लगा होगा कि नाम एक जैसा है, तो 147 किलोमीटर की दूरी तो इंसान चलते-चलते एडजस्ट कर ही लेगा।’
देखना दिलचस्प होगा कि इस एक्सक्लूसिव खुलासे के बाद लोक निर्माण विभाग की नींद टूटती है या फिर मुसाफ़िर यूं ही ‘शहर’ ढूंढते-ढूंढते छत्तीसगढ़ के ‘गांव’ में अपनी किस्मत चमकाते रहेंगे।
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