“जन्म से दिव्यांग हूँ, सरपंच से कहा था पर मदद मिली या नहीं पता नहीं… अब तो बस एक सहारे की आस है!”
नई पहल न्यूज नेटवर्क। भरतपुर। छत्तीसगढ़ के नवगठित मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के भरतपुर ब्लॉक से एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोलती और दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मोटरराइज्ड (इलेक्ट्रिक) ट्राईसाइकिल और तमाम योजनाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं धरातल पर भरतपुर ब्लॉक के मेंदौली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले बरसा गाँव के रहने वाले 38 वर्षीय दिव्यांग सुभान सिंह आज भी सरकारी सहायता के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
- कौन हैं पीड़ित? वीडियो में अपनी दर्द भरी दास्तान बयां करने वाले दिव्यांग का नाम सुभान सिंह (पिता: बच्चा लाल सिंह) है, जो मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के भरतपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत मेंदौली (बरसा गाँव) के रहने वाले हैं।
- जन्मजात दिव्यांगता और संघर्ष: सुभान सिंह जन्म से ही दिव्यांग हैं और चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण उनकी जिंदगी भीषण संघर्षों के बीच गुजर रही है।
- सरपंच के आश्वासन के भरोसे: पीड़ित ने बताया कि उसने ट्राईसाइकिल के लिए बात की थी, जिस पर सरपंच ने लिख कर देने की बात कही थी, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस मदद उन तक नहीं पहुँच पाई है।
- इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल की आस: सुभान सिंह को हाथ से चलाने वाली या आधुनिक इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल—शासन के नियमों के तहत जो भी सहायता अनुज्ञेय हो—उसकी सख्त दरकार है ताकि उनका जीवन थोड़ा सुगम हो सके।
प्रशासन से बड़ी उम्मीद:
वीडियो के माध्यम से अब यह मामला कमिश्नर और कलेक्टर साहब तक पहुँचाया गया है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्धजनों ने जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग से यह पुरजोर मांग की है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लिया जाए, ताकि जन्मजात दिव्यांग सुभान सिंह को जल्द से जल्द इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल मिल सके और वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।
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