— अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं: अधीक्षकों के लिए नाइट-स्टे और जियो-फेंसिंग फेस-अटेंडेंस अनिवार्य
— कन्या छात्रावासों में पुरुषों की एंट्री बैन, सिर्फ महिला स्टाफ की होगी तैनाती
— मलेरिया, डायरिया और सर्पदंश से मौतों पर लगाम कसने के लिए स्वास्थ्य तंत्र हुआ हाई-अलर्ट
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी और अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित होने वाले आश्रम-छात्रावासों (प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक, एकलव्य, प्रयास और कन्या शिक्षा परिसर) में अब बच्चों की जान और उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वालों की खैर नहीं होगी। बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और उनके अधिकारों (POCSO और JJ Act) के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक बेहद कड़ा और विस्तृत ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) का प्रस्ताव तैयार किया है। इस बाबत आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने विभाग के माननीय मंत्री रामविचार नेताम से उच्चस्तरीय मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की, जिसके बाद मंत्री महोदय ने इन प्रस्तावों पर त्वरित एवं ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए हैं।

SOP की वे बड़ी बातें, जो बदल देंगी छात्रावासों की तस्वीर
1. स्वास्थ्य सुरक्षा: बुखार आते ही 2 से 6 घंटे में अस्पताल का नियम
प्रदेश के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों में मलेरिया, डायरिया, पीलिया, सिकलसेल और सर्पदंश जैसी गंभीर बीमारियों से बच्चों की आकस्मिक मौतों को रोकने के लिए जीरो-टॉलरेंस नीति अपनाई गई है।

- हर छात्रावास को निकटतम 24×7 स्वास्थ्य केंद्र (PHC/CHC) और ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ से जोड़ा जाएगा।
- बच्चे को बुखार आते ही 2 से 6 घंटे के भीतर अनिवार्य रक्त जांच और अस्पताल रेफरल की SOP लागू होगी।
- प्रत्येक छात्र का ABHA ID से लिंक डिजिटल हेल्थ कार्ड बनेगा और सिकलसेल पॉजिटिव बच्चों को ‘रेड कार्ड’ श्रेणी में रखकर विशेष देखरेख व नियमित दवा दी जाएगी।
2. अनुशासन और निगरानी: अप-डाउन करने वाले अधीक्षकों पर शिकंजा
अब अधीक्षक मुख्यालय छोड़कर ‘अप-डाउन’ नहीं कर सकेंगे और न ही छात्रावासों को रसोइयों या चौकीदारों के भरोसे छोड़ा जा सकेगा।
- परिसर में अधीक्षकों का रात्रि निवास (Night Stay) अनिवार्य कर दिया गया है।
- रात 9:00 से 9:30 बजे के बीच जियो-फेंसिंग आधारित फेस-अटेंडेंस ली जाएगी।
- एक व्यक्ति के पास केवल एक ही छात्रावास के प्रभार का कड़ा नियम लागू होगा।
3. कन्या छात्रावासों में ‘नो-एंट्री ज़ोन’ और पुख्ता सुरक्षा (POCSO अनुपालन)
बालिकाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कन्या आश्रमों और छात्रावासों में सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए जा रहे हैं।
- केवल महिला अधीक्षक, महिला रसोइया और महिला गार्ड की ही तैनाती होगी; पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा।
- सभी प्रवेश द्वारों पर 30 दिन के बैकअप वाले नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरे, बाल सुरक्षा नीति और शिकायत पेटिका स्थापित की जाएगी।
- सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन, इंसिनरेटर (भस्मक) और साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड (WIFS) की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
4. मानसिक स्वास्थ्य, पौष्टिक आहार और कैंपस ऑडिट
- मेंटल हेल्थ व ड्रॉपआउट रोक: आत्महत्या और पढ़ाई छोड़ने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए नए छात्रों के लिए 15 दिवसीय ‘ओरिएंटेशन एवं संगवारी बडी सिस्टम’ और क्लस्टर स्तर पर मनोवैज्ञानिक काउंसलर की नियुक्ति होगी।
- भोजन और पोषण: महंगाई के अनुपात में भोजन भत्ता बढ़ाकर डाइट में स्थानीय पौष्टिक अनाज (रागी, कोदो-कुटकी), अंडा/दूध, हरी सब्जियां और गुड़-चना शामिल किए जाएंगे।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर सेफ्टी: मानसून से पहले सभी भवनों का स्ट्रक्चरल व इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट, मानक बाउंड्रीवॉल का निर्माण और खिड़कियों में मच्छरदानी (Wire Mesh) लगानी होगी।
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