पहले दिन हुआ सिर्फ शिष्टाचार, दूसरे दिन दूसरे धड़े ने शहर की बदहाल जलापूर्ति पर खोला मोर्चा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़ | एमसीबी जिले की नवपदस्थ कलेक्टर संतन देवी जांगड़े के कार्यभार संभालते ही राजनीतिक संगठनों के मिलने का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में महिला कांग्रेस के दो अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों ने दो दिनों के भीतर कलेक्टर से मुलाकात की। खास बात यह रही कि कांग्रेस की गुटबाजी यहाँ भी साफ नजर आई, जहाँ दोनों धड़ों ने एक साथ जाने के बजाय अलग-अलग दिन कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर अपनी सक्रियता दर्ज कराई।
पहले दिन की औपचारिक मुलाकात

सोमवार को महिला कांग्रेस के पहले धड़े ने कलेक्टर से सौजन्य भेंट की। यह मुलाकात पूरी तरह औपचारिक रही, जिसमें जिले के विकास और महिलाओं से जुड़े सामान्य विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से रूमा चटर्जी (शहरी जिला अध्यक्ष), निर्मला चतुर्वेदी (ग्रामीण जिला अध्यक्ष), रुक्मणी खोपरागड़े (प्रदेश पदाधिकारी), नीलिमा शामल (ब्लॉक अध्यक्ष), ममता रजक (जिला उपाध्यक्ष शहरी) एवं सरोज चौधरी (जिला सचिव) शामिल रहीं।
दूसरे दिन दूसरे धड़े ने उठाई जनसमस्याएं
मंगलवार को महिला कांग्रेस का दूसरा धड़ा कलेक्टर कार्यालय पहुँचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने केवल शिष्टाचार तक सीमित न रहकर शहर की ज्वलंत समस्याओं पर मुखर होकर बात की। उन्होंने मनेंद्रगढ़ में हो रही दूषित जलापूर्ति और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर गंभीर चिंता जताई। इस दौरान पार्षद किरण कुजूर, प्रदेश सचिव नीता डे, जिला सचिव शांति यादव, ब्लॉक सचिव मोहिनी महतो, ब्लॉक अध्यक्ष गीतिका चंदेल, एंजेलिना बार्टलेट, सुमन शुक्ला, अपूर्वा चौधरी, लक्ष्मी बाई, शांति बर्मन, सुशीला तोमर, अंजोरा बाई और कुसुंबी बाई मौजूद रहीं।
मुद्दों के बहाने वर्चस्व की जंग
जिले में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब संगठन एक है, तो कलेक्टर से मिलने के लिए दो अलग-अलग दिन क्यों चुने गए? दूसरे धड़े ने मनेंद्रगढ़ शहर में हो रही गंदे पानी की सप्लाई का मुद्दा उठाकर सीधे तौर पर नगर पालिका प्रशासन और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब अफसरों से मुलाकात और जनसमस्याओं को उठाने के मामले में भी यह खींचतान स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखने लगी है।
चर्चा में ‘अपनों’ की खींचतान
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि जब लक्ष्य एक ही था—’जनहित’, तो फिर एक साथ होने के बजाय अलग-अलग गुटों में मुलाकात क्यों ?
नजरिया: कांग्रेस में गुटबाजी की परंपरा पुरानी है, लेकिन कलेक्टर जैसे शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात के दौरान भी यह बिखराव पार्टी की एकजुटता पर सवालिया निशान खड़े करता है। एक ही संगठन के दो अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों का अलग-अलग दिनों में पहुँचना यह दर्शाता है कि एमसीबी में महिला कांग्रेस के भीतर तालमेल की भारी कमी है।
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