पूर्व विधायक गुलाब कमरो का भाजपा सरकार पर बड़ा हमला: “नोटिस और निलंबन से नहीं, संवाद से निकलेगा समाधान; किसान परेशान तो फिर किसका जश्न ?”
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़ : प्रदेश भर में धान खरीदी की तारीख नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ का अन्नदाता एक बार फिर प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और विभागीय खींचतान के भंवर में फंस गया है। एक तरफ जहां पटवारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं, वहीं दूसरी ओर धान पंजीयन और गिरदावरी (फसल सत्यापन) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने किसानों की बढ़ती परेशानियों और अव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।
“एक तरफ जश्न का ढोल, दूसरी तरफ अन्नदाता परेशान”
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने तीखे लहजे में सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक ओर भाजपा सरकार राज्योत्सव के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर विकास और खुशहाली का झूठा जश्न मना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि राज्य का किसान अपने हक की धान बेचने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पंजीयन और गिरदावरी न होने से किसानों के सिर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

निलंबन और नोटिस समस्या का हल नहीं, संवाद की नीति अपनाए सरकार
हड़ताली पटवारियों पर सरकार द्वारा की जा रही कठोर कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए गुलाब कमरो ने कहा:
“धान खरीदी का समय सिर पर है, ऐसे में 5 हजार पटवारियों को एस्मा (ESMA) या कार्रवाई के नोटिस जारी करना और 50 से अधिक पटवारियों को निलंबित कर देना किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। सरकार को अपनी तानाशाही और दमनात्मक कार्रवाई का रास्ता छोड़कर तुरंत पटवारियों के साथ मेज पर बैठकर संवाद करना चाहिए। उनकी जायज मांगों का तत्काल निराकरण किया जाए ताकि धान खरीदी की व्यवस्था पटरी पर लौट सके।”
किसानों और कर्मचारियों के पेट पर लात मारकर कैसा उत्सव?
गुलाब कमरो ने सरकार की नियत पर कड़ा हमला बोलते हुए अंत में सवाल दागा कि जब प्रदेश का किसान परेशान है और पटवारी अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, तो आखिर भाजपा सरकार किसकी खुशहाली का जश्न मना रही है? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते पटवारियों की हड़ताल समाप्त करवाकर किसानों के धान पंजीयन का कार्य सुचारू रूप से शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाएगी और इसका सीधा खामियाजा प्रदेश के मेहनतकश किसानों को भुगतना पड़ेगा।
About The Author










































