नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़। खोंगापानी नगर पंचायत क्षेत्र में रविवार की सुबह उस वक्त मातमी सन्नाटे में बदल गई, जब दोस्तों के साथ तालाब में नहाने गए एक 12 वर्षीय मासूम की गहरे पानी में डूबने से असामयिक मौत हो गई। गनीमत रही कि मौके से गुजर रहे एक साहसी युवक ने अपनी जान पर खेलकर तीन अन्य बच्चों को डूबने से बचा लिया, वरना यह हादसा और भी भयावह हो सकता था। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है, वहीं नगर पंचायत की जल आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है।
जान जोखिम में डालकर साकिर अली बने देवदूत, तीन मासूमों की बचाई जिंदगी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार सुबह चार बच्चे स्थानीय तालाब में नहाने के लिए उतरे थे। नहाते-नहाते चारों बच्चे अनजाने में तालाब के गहरे हिस्से की ओर चले गए और डूबने लगे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर वहां से गुजर रहे स्थानीय युवक साकिर अली ने बिना वक्त गंवाए तालाब में छलांग लगा दी। साकिर ने अपनी अदम्य वीरता का परिचय देते हुए तीन बच्चों को खींचकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, चौथा बच्चा गहरे पानी में ओझल हो गया, जिसे बचाया नहीं जा सका।

घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बरामद हुआ मोहम्मद जिकरान का शव
हादसे की सूचना मिलते ही खोंगापानी चौकी पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। गोताखोरों की मदद से तालाब के गहरे पानी में काफी देर तक तलाशी अभियान चलाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने मासूम का शव बाहर निकाला।
- मृतक की पहचान: मोहम्मद जिकरान (12 वर्ष)
- पिता का नाम: मोहम्मद एजाज
- निवासी: वार्ड क्रमांक-03, खोंगापानी
- पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की मर्ग जांच शुरू कर दी है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे तीखे सवाल: पानी का संकट या हादसों का न्योता?
इस दर्दनाक हादसे ने नगर पंचायत खोंगापानी की बदहाल व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी जताते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
- पेयजल का संकट: नगर पंचायत क्षेत्र के कई वार्डों में पर्याप्त पानी की आपूर्ति न होने के कारण लोगों और बच्चों को दैनिक कार्यों व नहाने के लिए असुरक्षित तालाबों का रुख करना पड़ता है।
- सुरक्षा इंतजाम शून्य: जिस तालाब में यह हादसा हुआ, उसे मछली पालन के लिए एक महिला समूह को आवंटित किया गया है। इसके बावजूद वहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे।
- चेतावनी बोर्ड व घेराबंदी का अभाव: तालाब के गहरे क्षेत्रों को चिन्हित करने के लिए न तो कोई चेतावनी बोर्ड (Danger Sign) लगाया गया था और न ही कोई सुरक्षा घेरा बनाया गया था।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते नगर पंचायत प्रशासन पानी की उचित व्यवस्था करता और तालाबों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते, तो मोहम्मद जिकरान आज जिंदा होता। ग्रामीणों ने भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सभी जल स्रोतों पर तत्काल सुरक्षा घेरा और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है।
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