एमसीयू में हुआ पुस्तक ‘जनमाध्यम युवा और मीडिया साक्षरता’ का भव्य विमोचन; कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी समेत दिग्गज रहे मौजूद
नई पहल न्यूज नेटवर्क। भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. प्रदीप डहेरिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘जनमाध्यम युवा और मीडिया साक्षरता’ का विमोचन किया गया। विश्वविद्यालय में आयोजित ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम’ (AI-FDP) के दौरान मीडिया, एआई और रिसर्च क्षेत्र के शीर्ष विशेषज्ञों की उपस्थिति में इस पुस्तक का गरिमामयी विमोचन संपन्न हुआ।
पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से मीडिया अध्यापन में सक्रिय डॉ. डहेरिया की यह कृति आज के दौर में युवाओं और समाज के लिए मीडिया साक्षरता की अनिवार्यता को रेखांकित करती है। इस पुस्तक की भूमिका विश्वविद्यालय के कुलगुरु और वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय मनोहर तिवारी ने लिखी है।
दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ विमोचन
इस विशेष अवसर पर मीडिया और सूचना प्रौद्योगिकी जगत की कई नामचीन हस्तियां मौजूद रहीं, जिन्होंने पुस्तक का विमोचन कर लेखक को बधाई दी:
- विजय मनोहर तिवारी (कुलगुरु, MCU)
- प्रो. आशुतोष कुमार सिंह (निदेशक, IIIT भोपाल)
- श्री बालेंदु शर्मा दाधीच (प्रख्यात मीडिया एवं आईटी विशेषज्ञ)
- डॉ. प्रो. संजय द्विवेदी (विभागाध्यक्ष, जनसंचार विभाग, MCU)
- प्रो. पवित्र श्रीवास्तव (विभागाध्यक्ष, विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग)
- डॉ. आरती सारंग (लाइब्रेरियन एवं प्रोफेसर, पुस्तकालय व सूचना विज्ञान विभाग)
क्यों खास है यह पुस्तक ?
आज के डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में ‘मीडिया साक्षरता’ वैश्विक चर्चा का विषय है। डॉ. प्रदीप डहेरिया ने अपनी इस पुस्तक में समाज और आम जनमानस के लिए इसकी जरूरत पर विस्तार से प्रकाश डाला है।
पुस्तक के मुख्य बिंदु:
- विविध आयामों का समावेश: पुस्तक में प्रिंट, रेडियो, टेलीविजन, डिजिटल इंटरनेट और सोशल मीडिया सहित जनसंचार के सभी माध्यमों का गहराई से विश्लेषण किया गया है।
- युवाओं पर केंद्रित: यह पुस्तक विशेष रूप से युवा पीढ़ी को ध्यान में रखकर लिखी गई है, ताकि वे सूचनाओं के इस दौर में सही और गलत का अंतर समझ सकें।
शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भ्रामक खबरों और सूचनाओं की बहुतायत के बीच यह पुस्तक विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक मार्गदर्शिका साबित होगी। विषय विशेषज्ञों ने इसे अकादमिक क्षेत्र के लिए एक बेहद उपयोगी और सामयिक दस्तावेज बताया।
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