महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विधायक संगीता सिन्हा के संग संस्कृति की छांव में खिलखिलाया बचपन
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बालोद। छत्तीसगढ़ के पावन लोकपर्व ‘पोला तिहार’ के अवसर पर संजाती और लोक-परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिला। महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं लोकप्रिय विधायक संगीता सिन्हा के निवास पर उत्सव का रंग पूरी तरह छत्तीसगढ़ी माटी की खुशबू से सराबोर रहा। इस अवसर पर उन्होंने छोटे-छोटे बच्चों के साथ मिलकर पारंपरिक ढंग से माटी के ‘नंदिया-बैला’ बनाए और बच्चों की सहज टोली संग इस लोकउत्सव का खुलकर आनंद लिया।
माटी शिल्प और परंपरा का जीवंत संगम
उत्सव के दौरान विधायक संगीता सिन्हा बच्चों के बीच पूरी तरह आत्मीय भाव से घुली-मिली नजर आईं। उन्होंने न केवल मिट्टी को आकार देकर ‘नंदिया-बैला’ गढ़े, बल्कि बच्चों को इस पर्व के पारंपरिक महत्व और खिलौनों के पीछे छिपी लोक-कला से भी परिचित कराया। खिलखिलाते बच्चों के साथ खेलते हुए उन्होंने संदेश दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों और लोक-संस्कृति से जुड़ाव ही हमारी असली पहचान है।
कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का पर्व

इस अवसर पर संगीता सिन्हा ने कहा:
पोला तिहार केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी कृषि संस्कृति, पशुधन और माटी के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। जब हम अपने बच्चों को इन परंपराओं में भागीदार बनाते हैं, तो हम अपनी नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का पवित्र कार्य करते हैं।
नई पीढ़ी को मिला विरासत का संबल
विधायक जी के निवास पर आयोजित इस आत्मीय उत्सव ने यह साबित किया कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं लोक-संस्कृति के संरक्षण में आगे आते हैं, तो समाज में अपनी परंपराओं के प्रति गर्व का भाव स्वतः जागृत होता है। बच्चों की मासूम हंसी, माटी के खिलौने और पोला की पारंपरिक उमंग ने इस आयोजन को अत्यंत यादगार और प्रेरणादायी बना दिया।
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