नई पहल न्यूज नेटवर्क। सोनहत। जहाँ राजनीति में प्रतिद्वंद्विता की दीवारें अक्सर ऊँची रहती हैं, वहीं भरतपुर-सोनहत विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने शिव महापुराण कथा के माध्यम से एक नई लकीर खींच दी है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सोनहत की धरा पर भक्ति और शक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
शिवभक्ति में डूबा विपक्ष: नेता प्रतिपक्ष से लेकर धुर विरोधी तक पहुंचे
इस आयोजन की सबसे बड़ी सुर्खी रहे कांग्रेस के वे दिग्गज नेता, जो अमूमन भाजपा के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखते हैं। लेकिन रेणुका सिंह के आह्वान पर रविवार को नजारा बदला हुआ था:

- महंत परिवार की उपस्थिति: विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उनकी पत्नी और कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत, पुत्र सूरज महंत और बेटी ने कार्यक्रम में शिरकत कर गरिमा बढ़ाई।
- प्रतिद्वंद्विता हुई गौण: सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व विधायक गुलाब कमरो की रही। विधानसभा चुनाव में रेणुका सिंह के खिलाफ कड़े मुकाबले में रहे कमरो ने न केवल कथा में हिस्सा लिया, बल्कि इस भव्य आयोजन के लिए रेणुका सिंह को धन्यवाद भी दिया।
- दिग्गजों का जमावड़ा: पूर्व संसदीय सचिव अंबिका सिंहदेव, पूर्व विधायक विनय जायसवाल, और दोनों जिलों (कोरिया व MCB) के कांग्रेस अध्यक्षों सहित एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे की मौजूदगी ने इसे ‘सर्वदलीय’ स्वरूप दे दिया।
‘दलगत भावना से ऊपर उठकर काम’

रेणुका सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन राजनीति का अखाड़ा नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र होने चाहिए। उन्होंने कल ही ‘नई पहल’ से कहा था कि धार्मिक कार्यों में राजनीतिक दीवारों को ढहाने की जरूरत है।
”सांसद ज्योत्सना महंत ने इस सफल आयोजन के लिए रेणुका सिंह को बधाई दी, वहीं डॉ. चरणदास महंत ने रेणुका सिंह की पुत्री अधिवक्ता मोनिका सिंह से मुलाकात कर उन्हें अपनी माँ का ख्याल रखने की आत्मीय सलाह दी।”
सियासी चश्मे से: सोनहत पर टिकीं रेणुका की नजरें ?
भले ही यह आयोजन धार्मिक हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसके पीछे के समीकरणों को भी पढ़ रहे हैं:
- लोकसभा की कसक और विधानसभा की मजबूती: 2023 में भाजपा ने यहाँ की तीनों सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में ज्योत्सना महंत को इसी बेल्ट से अच्छी बढ़त मिली थी। ऐसे में रेणुका सिंह द्वारा विपक्ष के तमाम नेताओं को एक मंच पर लाना उनकी स्वीकार्यता और समन्वय की राजनीति को दर्शाता है।
- परिसीमन और भविष्य की तैयारी: क्षेत्र में चर्चा आम है कि आगामी परिसीमन के बाद सोनहत एक स्वतंत्र विधानसभा सीट बन सकती है। रेणुका सिंह का इस क्षेत्र में बढ़ता सामाजिक और धार्मिक दखल संकेत दे रहा है कि वे भविष्य के लिए अपनी जमीन और अधिक पुख्ता कर रही हैं।
सियासी शिष्टाचार या भविष्य के संकेत ?
डॉ. महंत की मोनिका सिंह को ‘खास’ नसीहत
शिव महापुराण कथा के मंच पर एक बेहद दिलचस्प और आत्मीय दृश्य तब देखने को मिला, जब छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का सामना विधायक रेणुका सिंह की सुपुत्री और जिला पंचायत सदस्य अधिवक्ता मोनिका सिंह से हुआ।
अपनी राजनीतिक परिपक्वता के लिए जाने जाने वाले डॉ. महंत ने मोनिका सिंह के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और बड़े ही सहज लहजे में कहा— “अपनी माँ (रेणुका सिंह) का खूब ख्याल रखना।”
इसके गहरे राजनीतिक मायने: जानकारों का मानना है कि डॉ. महंत का यह बयान केवल पारिवारिक शिष्टाचार नहीं था। विधानसभा चुनाव के दौरान जिस तरह मोनिका सिंह ने भरतपुर-सोनहत में मोर्चा संभाला और अपनी माँ के लिए एक ‘अजेय ढाल’ बनकर उभरीं, उसे विपक्षी खेमा भी पूरी गंभीरता से ले रहा है। एक अनुभवी राजनीतिज्ञ द्वारा एक युवा रणनीतिकार को दी गई यह ‘नसीहत’ क्षेत्र की राजनीति में मोनिका सिंह की बढ़ती स्वीकार्यता और उनके रसूख को रेखांकित करती है।
सोनहत का यह शिव महापुराण केवल कथा वाचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘सौहार्द’ का एक नया अध्याय लिख दिया है। रेणुका सिंह ने दिखा दिया है कि वे न केवल एक कद्दावर नेत्री हैं, बल्कि विरोधियों को भी अपने मंच तक खींच लाने का हुनर बखूबी जानती हैं।
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