आठ से दस दिन तक संयम, साधना और उपवास में लीन रहेगा जैन समाज
‘मिच्छामी दुक्कड़म्’ के संदेश से जगता है सद्भाव और क्षमा का भाव
आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का पर्व, जीवन में मोक्ष की ओर बढ़ने का संकल्प

नई पहल न्यूज नेटवर्क। न्यूज डेस्क। आज से जैन समाज का सबसे पवित्र और आत्मशुद्धि का महापर्व पर्यूषण शुरू हो गया है। यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आत्मा की साधना, संयम, करुणा और क्षमा का सजीव उदाहरण है।
हर वर्ष भाद्रपद मास में मनाया जाने वाला यह पर्व जैन समाज का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व माना जाता है।
पर्यूषण का महत्व
पर्यूषण शब्द का अर्थ है – आत्मा में ठहरना या बसना। इसका उद्देश्य है कुछ समय के लिए संसारिक मोह-माया से दूर होकर आत्मा का चिंतन और आत्मशुद्धि करना। इसे आत्मकल्याण और मोक्ष की ओर ले जाने वाला मार्ग भी कहा जाता है।
कितने दिन चलता है पर्व ?
श्वेतांबर समाज : 8 दिन तक अष्टान्हिका पर्व के रूप में।
दिगंबर समाज : 10 दिन तक दशलक्षण पर्व के रूप में।
इन दिनों में श्रद्धालु उपवास, व्रत, स्वाध्याय और ध्यान करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजन और प्रवचन का आयोजन होता है।
कैसे रखते हैं व्रत और तपस्या
पर्यूषण पर्व में श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखते हैं –
कोई पूर्ण उपवास करता है।
कोई एकासना (एक बार भोजन) करता है।
कुछ लोग केवल जल या फलाहार पर रहते हैं।
इस तपस्या का उद्देश्य है शरीर पर नियंत्रण कर आत्मा की शक्ति को जागृत करना।
धार्मिक गतिविधियाँ
जिनालयों और मंदिरों में सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना और प्रवचन होते हैं।
साधु-साध्वियाँ प्रवचन में अहिंसा, संयम और क्षमा का महत्व बताते हैं।
घर-घर में स्वाध्याय, धार्मिक पुस्तक पठन और जप-ध्यान होता है।
क्षमा और ‘मिच्छामी दुक्कड़म्’ का संदेश
पर्यूषण पर्व का सबसे भावुक क्षण होता है अंतिम दिन की क्षमा याचना। इस दिन जैन समाज के लोग एक-दूसरे से कहते हैं –
“मिच्छामी दुक्कड़म्” जिसका अर्थ है – यदि मुझसे जाने-अनजाने में कोई भूल हुई हो तो कृपया क्षमा करें। यह परंपरा मन की कटुता मिटाकर भाईचारे और सद्भाव को गहराई देती है।
मानवता को देने वाला संदेश
पर्यूषण पर्व केवल जैन समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संदेश पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायी है।
यह हमें सिखाता है –
क्रोध, अहंकार और लोभ को त्यागना।
क्षमा, करुणा और अहिंसा को जीवन में अपनाना।
आत्मा की शुद्धि कर मोक्ष की ओर बढ़ना।
मानवता, प्रेम और आत्मशुद्धि का उत्सव
आज से शुरू हुआ पर्यूषण पर्व आने वाले आठ से दस दिन तक पूरे क्षेत्र में भक्ति, संयम और क्षमा का वातावरण बनाए रखेगा।
अंत में जब हर कोई “मिच्छामी दुक्कड़म्” कहकर एक-दूसरे से क्षमा माँगेगा, तो यह पर्व सचमुच मानवता, प्रेम और आत्मशुद्धि का उत्सव बन जाएगा।
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