खाद्य सुरक्षा विभाग से रखी गई पूरी कार्रवाई गुप्त; कलेक्टर विनय लंगेह के सख्त रुख ने खोली विभागीय मिलीभगत की पोल, सोशल मीडिया पर उठ रहे गंभीर सवाल
प्रशासनिक कार्रवाई से हड़कंप: गुप्त मिशन के तहत आधी रात दबिश
नई पहल न्यूज नेटवर्क। महासमुंद। जिले के भलेसर रोड स्थित ‘वैद्य फूड्स’ में जिला प्रशासन ने देर रात एक बड़ी और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम दिया है। छत्तीसगढ़ में एनालॉग (नकली) पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद अवैध रूप से इसका निर्माण और बिक्री किए जाने की शिकायत कलेक्टर विनय लंगेह को मिली थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा विभाग को भनक तक नहीं लगने दी और सीधे राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम को मौके पर भेजा।
एसडीएम अक्षा गुप्ता के मार्गदर्शन और तहसीलदार जुगल किशोर के नेतृत्व में टीम ने आधी रात करीब 12 बजे वैद्य फूड्स के परिसर में छापा मारा। जांच के दौरान मौके पर लगभग 200 किलोग्राम संदिग्ध पनीर का निर्माण होता पाया गया, जिसे तुरंत ज़ब्त कर कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखवा दिया गया था।

लैब रिपोर्ट में हुआ खुलासा: सैंपल हुआ फेल, पनीर नष्ट
ज़ब्त किए गए पनीर का नमूना गुणवत्ता परीक्षण हेतु राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर भेजा गया था। प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में पनीर का सैंपल पूरी तरह असुरक्षित पाया गया है।
रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही संयुक्त प्रशासनिक टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए:
- ज़ब्त किए गए संपूर्ण 200 किलोग्राम अमानक/नकली पनीर को नियमानुसार पूरी तरह नष्ट कर दिया।
- आगे की विधिक कार्रवाई पूरी होने तक वैद्य फूड्स फर्म को सील कर दिया गया है।
सूचना लीक होने के डर से खाद्य विभाग को रखा गया दूर

जिले में अमानक खाद्य पदार्थों पर कार्रवाई के दौरान अक्सर सूचनाएं लीक होने और शिकायतकर्ताओं की पहचान उजागर होने की शिकायतें मिलती रही हैं। इसी के चलते इस बार कलेक्टर के निर्देश पर पूरी रणनीति अत्यंत गोपनीय रखी गई:
- मौके पर पहुंचकर बुलावा: राजस्व विभाग की टीम ने पहले वैद्य फूड्स के बाहर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और उसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को मौके पर तलब किया।
- अधिकारियों का रवैया: सूचना मिलने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी शंखनाद भोई तो मौके पर पहुंचे, लेकिन अभिहित अधिकारी उमेश वर्मा पूरी कार्रवाई के दौरान नदारद रहे। आधी रात की इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में उनकी अनुपस्थिति ने विभाग के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर कर दिया है।
लाइसेंस और विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
सैंपल फेल होने के बाद अब स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया पर खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। जनता द्वारा प्रशासन और विभाग से निम्नलिखित बिंदुओं पर पारदर्शिता की मांग की जा रही है:
- लाइसेंस की श्रेणी: फर्म को किस श्रेणी के तहत और कब लाइसेंस जारी किया गया था? यदि एनालॉग पनीर का लाइसेंस था, तो प्रतिबंध के बाद इसे निलंबित क्यों नहीं किया गया?
- पूर्व निरीक्षण का रिकॉर्ड: इससे पहले इस फर्म का निरीक्षण और सैंपलिंग कब-कब की गई थी? यदि सैंपल लिए गए थे तो उनकी रिपोर्ट क्या थी?
- विभागीय लापरवाही: इतने लंबे समय से जनता को अमानक पनीर परोसे जाने के बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग निष्क्रिय क्यों बना रहा?
जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSSAI) के प्रावधानों के तहत किसी खाद्य पदार्थ का सैंपल ‘असुरक्षित’ पाए जाने पर संबंधित फर्म व संचालक के विरुद्ध संबंधित न्यायालय में मामला दर्ज किया जाता है।
दोषी पाए जाने की स्थिति में संचालक को भारी जुर्माने के साथ-साथ कारावास (जेल) की सजा का प्रावधान है। अब देखना यह होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग न्यायालय में इस मामले को कितनी मजबूती से प्रस्तुत करता है।
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