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पलारी में गरजी ‘संजारी की सिंहनी’: महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष संगीता सिन्हा के चक्रव्यूह में फंसी भाजपा, रचा इतिहास !

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सत्ता के रसूख पर भारी पड़ा ‘संगीता’ का संघर्ष; जिस पलारी को खुद की जिद पर नगर पंचायत बनाया, वहां एकतरफा जीत दर्ज कर साबित किया अपना राजनीतिक लोहा

नई पहल न्यूज नेटवर्क। बालोद । इसे कहते हैं नेतृत्व की असली धमक और संगठन की ताकत! संजारी बालोद विधानसभा के नवगठित पलारी नगर पंचायत के प्रथम चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष व स्थानीय विधायक संगीता सिन्हा केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीत की एक अचूक ‘गारंटी’ बन चुकी हैं। सत्ताधारी दल के तमाम दांव-पेचों और प्रशासनिक दबाव को धता बताते हुए संगीता सिन्हा ने पलारी के ऐतिहासिक रण में कांग्रेस का वो परचम लहराया है, जिसकी गूंज राजधानी रायपुर तक सुनाई दे रही है।

अध्यक्ष पद के युवा और कर्मठ प्रत्याशी यानेश साहू ने 506 वोटों के भारी-भरकम अंतर से ऐतिहासिक जीत का तमगा अपने नाम किया है। यह जीत केवल एक नगर पंचायत की जीत नहीं है, बल्कि महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगीता सिन्हा के बढ़ते सियासी कद और उनकी बेजोड़ चुनावी रणनीति पर जनता की सबसे बड़ी मुहर है।


‘संगीता’ की सेना ने किया विपक्ष का सूपड़ा साफ: वार्डों का गणित

​महिला प्रदेश अध्यक्ष के कुशल मार्गदर्शन में कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं ने पलारी के कोने-कोने में ऐसी व्यूह रचना की कि विपक्षी खेमा उसमें उलझकर रह गया:

  • कांग्रेस का ‘हाथ’ मजबूत: 15 वार्डों में से 09 पार्षदों ने प्रचंड जीत दर्ज की।
  • विपक्ष पस्त: भाजपा केवल 05 वार्डों पर सिमट कर रह गई।
  • एक पद पर टाई: 01 वार्ड में मुकाबला बराबरी का रहा।

सियासी गलियारों की चर्चा: राजनैतिक पंडित मान रहे हैं कि संगीता सिन्हा ने जिस तरह से जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाला, उसी का नतीजा है कि कांग्रेस ने यहाँ बिना किसी बैसाखी के पूर्ण बहुमत की ‘जन-सरकार’ बना ली है।

एक महिला लीडर का संकल्प: शून्य से शिखर तक का सफर

यह जीत संगीता सिन्हा के लिए बेहद भावुक और प्रतिष्ठा की लड़ाई थी। यह संगीता सिन्हा की ही राजनीतिक जिद और अथक प्रयास थे कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लड़कर-भिड़कर पलारी को ग्राम पंचायत के दर्जे से मुक्त कराकर ‘नगर पंचायत’ की नई पहचान दिलाई थी।

​जब चुनाव का बिगुल बजा, तो संगीता सिन्हा ने एक सच्चे सेनापति की तरह मोर्चे की कमान खुद संभाली। उनके साथ छत्तीसगढ़ के दिग्गज नेताओं सहित संजारी बालोद से ‘जीत की हैट्रिक’ बनाने वाले उनके हमकदम और पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। सिन्हा दंपत्ति ने पलारी के एक-एक घर, एक-एक महिला और युवाओं के दरवाजे पर दस्तक दी। संगीता सिन्हा ने महिला प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते विशेष रूप से आधी आबादी (महिला वोटरों) को कांग्रेस के स्वर्णिम कार्यकाल और जनहितैषी योजनाओं से जोड़ा, जिसने चुनाव का पूरा रुख ही पलट दिया।

प्रशासनिक तंत्र के सामने चट्टान बनकर खड़ी रहीं संगीता

​मतदान के दिन की वो तस्वीरें आज भी हर कार्यकर्ता के जेहन में ताजा हैं, जब तपती धूप में भी संजारी की यह लोकप्रिय विधायक और महिला कांग्रेस अध्यक्ष हर एक मतदान केंद्र पर खुद मुस्तैद रहीं। जब सत्ता के प्रभाव में प्रशासनिक तंत्र नियमों की अनदेखी कर रहा था, तब संगीता सिन्हा ने एक निडर नेत्री की तरह प्रशासन को चेताया था और कैमरे के सामने गरजते हुए कहा था— “वर्तमान सरकार के इशारे पर नाच रहा प्रशासन भले ही हमारी आवाज न सुने, लेकिन पलारी की स्वाभिमानी जनता अपने ‘बैलेट’ से इस तानाशाही का करारा जवाब देगी।”

​आज जब मतपेटियां खुलीं, तो संगीता सिन्हा के उस ‘महिला संकल्प’ और अटूट विश्वास की जीत हुई। पलारी की जनता ने साबित कर दिया कि सत्ता भले बदल जाए, लेकिन संजारी बालोद में संगीता सिन्हा का जनता से जुड़ाव और उनका ‘सिन्हा ब्रांड’ आज भी अभेद्य है। इस शानदार और ऐतिहासिक जीत ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगीता सिन्हा के कुशल नेतृत्व क्षमता को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है।

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