ADEO भर्ती पर विभाग की ‘कुंडली’: परीक्षा और परिणाम के बाद अब ‘तारीख पर तारीख’, अधर में 1500 अभ्यर्थियों का भविष्य

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दस्तावेज सत्यापन के 2 माह बाद भी ‘पात्र-अपात्र’ सूची का अता-पता नहीं, PWD में मिली ज्वाइनिंग, पंचायत विभाग अब भी दे रहा दलीलों का हवाला

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षित बेरोजगार युवाओं का भविष्य एक बार फिर सरकारी लेटलतीफी की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा आयोजित सहायक विकास विस्तार अधिकारी (ADEO) भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थी इन दिनों दर-दर भटकने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि चयन प्रक्रिया के अंतिम चरणों तक पहुँचने के बावजूद विभाग ‘पात्र-अपात्र’ की सूची जारी करने की जहमत नहीं उठा पा रहा है।

भर्ती का गणित: विज्ञापन से अब तक का सफर

​पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस भर्ती के लिए 2 अप्रैल 2025 को विज्ञापन जारी किया था। 15 जून को परीक्षा हुई और 14 अगस्त को व्यापम ने परिणाम घोषित कर दिए। विभाग ने बोनस अंकों के विवाद को सुलझाते हुए 10 सितंबर को संशोधित सूची भी जारी की। 7 से 14 अक्टूबर के बीच दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीद थी कि दीपावली तक युवाओं के हाथों में नियुक्ति पत्र होगा, लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी सन्नाटा पसरा हुआ है।

दलीलों के जाल में फंसा विभाग

​सूत्रों के अनुसार, जब अभ्यर्थी विभाग के चक्कर काटते हैं, तो उन्हें ‘उच्च शिक्षा विभाग’, ‘निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग’ और ‘उच्च न्यायालय’ के पचड़ों का हवाला देकर टरका दिया जाता है। ताज्जुब की बात यह है कि उच्च शिक्षा विभाग ने मांगी गई जानकारियाँ पंचायत विभाग को पहले ही उपलब्ध करा दी हैं, इसके बावजूद अधिकारियों का ढुलमुल रवैया बरकरार है।

PWD आगे, पंचायत विभाग पीछे: तुलनात्मक दर्द

​अभ्यर्थियों का आक्रोश इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इसी दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) की भर्ती प्रक्रिया भी चली। पीडब्ल्यूडी ने दस्तावेज सत्यापन के तत्काल बाद नवंबर महीने में अभ्यर्थियों को ज्वाइनिंग दे दी। वहीं, एडीईओ के अभ्यर्थी आज भी विभागीय फाइलों के बीच अपनी पात्रता का उत्तर तलाश रहे हैं।

सुस्त प्रणाली, बेबस युवा

​सवाल यह उठता है कि जब व्यापम ने अपनी जिम्मेदारी समय पर पूरी कर ली, तो पंचायत विभाग की सुस्त चाल का खामियाजा बेरोजगार युवा क्यों भुगतें? सरकारी तंत्र के इस मनमाने रवैये से न केवल युवाओं का मनोबल टूट रहा है, बल्कि सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

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