दुनिया के किसी देश को नहीं मिला ‘माँ’ का दर्जा, पर भारत की गोद में विराजी है ‘छत्तीसगढ़ महतारी’, कलेक्टोरेट से सीएम हाउस तक ममतामयी मूरत का पहरा
रविकांत सिंह राजपूत। नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर| दुनिया के मानचित्र पर सैकड़ों देश और हजारों राज्य हैं, लेकिन अपनी माटी को ‘जननी’ कहकर पुकारने का सौभाग्य सिर्फ हमें प्राप्त है। वैश्विक स्तर पर जहाँ राष्ट्रों को केवल सीमाओं से पहचाना जाता है, वहीं ‘भारत माता’ के रूप में हमारा देश पूरी दुनिया में वंदनीय है। इसी महान विरासत को आगे बढ़ाते हुए, भारत के हृदय स्थल में ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का स्वरूप हमारी अस्मिता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक बनकर उभरा है।
विश्व में निराला ‘माता’ का संबोधन
यह कोई सामान्य बात नहीं है कि पूरे विश्व में केवल भारत ही वह देश है जिसे ‘माता’ का दर्जा प्राप्त है। इसी गौरवशाली परंपरा का विस्तार हमारे प्रदेश में दिखता है, जहाँ हम केवल छत्तीसगढ़ नहीं, बल्कि ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ कहते हैं। यह संबोधन हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और शासन-प्रशासन को जनता की ‘संतान’ की तरह सेवा करने की प्रेरणा देता है।

राजकाज के केंद्र में ‘महतारी’ का स्थान
छत्तीसगढ़ की माटी का मान अब केवल खेतों और खलिहानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सत्ता के गलियारों में सर्वोच्च सम्मान दिया गया है:
- कलेक्टोरेट से कार्यालयों तक: प्रदेश के हर जिले के कलेक्टोरेट में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा स्थापित है, जो न्याय और संरक्षण का प्रतीक है।
- सत्ता का केंद्र : मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सभी मंत्रियों के कक्षों और शासकीय भवनों में महतारी की मूरत विराजित है।
- अस्मिता की पहचान: शासकीय कार्यक्रमों की शुरुआत ‘अरपा पैरी के धार’ (राजकीय गीत) और महतारी की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है।
धान की बाली और ममता का आशीर्वाद
हाथों में धान की सुनहरी बाली लिए, आशीर्वाद की मुद्रा में खड़ी छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा यह संदेश देती है कि यह प्रदेश न केवल अन्नदाता है, बल्कि अपनी संतानों के लिए ममता का भंडार भी है। यह मूर्ति अब छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोककला और स्वाभिमान का सबसे बड़ा वैश्विक चेहरा बन चुकी है।
गर्व का क्षण: क्यों है यह अनूठा ?
जहाँ अन्य संस्कृतियों में देश को ‘फादरलैंड’ या महज एक ‘टेरिटरी’ (क्षेत्र) माना जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ ने अपनी माटी को साक्षात ‘महतारी’ मानकर यह सिद्ध कर दिया है कि हमारे लिए विकास से पहले अपनी संस्कृति और संस्कारों का पूजन सर्वोपरि है।
गर्व से कहिए… जय भारत माता! जय छत्तीसगढ़ महतारी!
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