आतंकी हमले की पहली बरसी पर व्यापारी दंपत्ति के घर खुशियों ने दी दस्तक, बेटे का नाम रख यादगार बनाया सफर
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़/चिरमिरी। कहते हैं कि समय हर जख्म को भर देता है, लेकिन कुछ यादें ऐसी होती हैं जो जीवन भर साथ चलती हैं। चिरमिरी के एक व्यापारी परिवार के लिए 22 अप्रैल की तारीख एक तरफ जहां दहशत और मौत के साये की याद दिलाती है, वहीं अब यही तारीख उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी का प्रतीक बन गई है। पिछले साल कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में बाल-बाल बचे दंपत्ति के घर ठीक एक साल बाद बेटे का जन्म हुआ है, जिसका नाम उन्होंने ‘पहल’ रखकर उस खौफनाक मंजर की यादों को एक सकारात्मक मोड़ दे दिया है।
मौत को मात देकर लौटे थे 11 लोग
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में 22 अप्रैल के दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 26 पर्यटकों ने अपनी जान गंवाई थी। उस वक्त एमसीबी जिले के चिरमिरी से 11 लोग (कुलदीप स्थापक, हैप्पी बधावन, शिवांश जैन, आशीष अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल सहित अन्य) वहां घूमने गए थे। गोलियों की तड़तड़ाहट और चीख-पुकार के बीच ये सभी लोग सुरक्षित बचकर निकले थे। आज भी उस घटना को याद कर रूह कांप जाती है।

सालभर बाद उसी तारीख पर ‘पहल’ का आगमन
प्रकृति का संयोग देखिए कि जिस तारीख (22 अप्रैल) को उस भयावह घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, ठीक एक साल बाद उसी तिथि पर व्यापारी परिवार के आंगन में नन्हे मेहमान की किलकारी गूंजी। परिवार ने तय किया कि वे इस डर को हमेशा के लिए खत्म करेंगे। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने पुत्र का नाम ‘पहल’ रखा है, जो न केवल पहलगाम की याद दिलाता है, बल्कि जीवन की एक नई और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक भी है।
पहलगाम की वह घटना हमारे जीवन का सबसे काला दिन था। हमने मौत को बहुत करीब से देखा था। आज जब ईश्वर ने हमें पुत्र रत्न की प्राप्ति दी है, तो हमने उस स्थान की याद में इसका नाम ‘पहल’ रखा है ताकि वह कड़वी यादें अब इस मासूम की मुस्कान के साथ खुशियों में बदल जाएं।
— अरविंद अग्रवाल
नई पहल : डर पर जीत का संदेश
‘नई पहल’ न्यूज़ पोर्टल इस बहादुर परिवार के जज्बे को सलाम करता है। यह खबर हमें सिखाती है कि इंसान का हौसला किसी भी आतंकी खौफ से बड़ा होता है। नन्हा ‘पहल’ अब उस परिवार के लिए केवल एक बच्चा नहीं, बल्कि अंधेरे के बाद आए उजाले की एक नई किरण है।
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