नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। जिला महिला कांग्रेस की बहुप्रतीक्षित कार्यकारिणी घोषणा के साथ ही विवादों के घेरे में आ गई है। जिलाध्यक्ष रोमा चटर्जी द्वारा शुक्रवार को जारी की गई नियुक्तियों की सूची को अब वापस लेने और उसमें सुधार करने की नौबत आ गई है। ‘नई पहल’ में खबर प्रकाशित होने और संगठन के भीतर मचे घमासान के बाद जिलाध्यक्ष ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि सूची में भारी ‘लिपिकीय त्रुटियाँ’ थीं।

एक नाम ने खोली व्यवस्था की पोल: ‘संतोषी’ बन गईं ‘संतोष’
कल जारी सूची में सबसे बड़ी लापरवाही तब उजागर हुई जब संतोषी सिंह आयाम को ‘संतोष सिंह आयाम’ लिखकर जिला महासचिव नियुक्त कर दिया गया। किसी महिला संगठन की सूची में जेंडर संबंधी ऐसी बुनियादी चूक ने संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इसके अलावा, नियमानुसार कार्यकारिणी की प्रति प्रदेश संगठन को भी नहीं भेजी गई थी, जिसे अनुशासनहीनता और प्रक्रियात्मक चूक माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर जिलाध्यक्ष की सफाई: “जारी होगी संशोधित सूची”
मामला तूल पकड़ते ही जिलाध्यक्ष रोमा चटर्जी ने कांग्रेस के विभिन्न ग्रुपों में ‘महत्वपूर्ण सूचना’ साझा करते हुए लिखा:
“जिला महिला कांग्रेस कमेटी MCB की नियुक्ति सूची में लिपिकीय त्रुटि एवं अन्य कारणों के चलते, प्रदेश कार्यालय के निर्देशानुसार त्रुटिपूर्ण नामों का सुधार कर संशोधित सूची पृथक से जारी की जाएगी। कृपया सभी साथी इसे संज्ञान में लें।
पर्दे के पीछे का सच: मनमानी नियुक्तियों से दिग्गज भी हैरान
सूत्रों का दावा है कि मामला सिर्फ ‘स्पेलिंग मिस्टेक’ का नहीं है। चर्चा है कि इस कार्यकारिणी में कई नियुक्तियां मनमाने ढंग से की गई थीं। जब सूची सार्वजनिक हुई, तो जिले के कई कांग्रेसी नेता उसमें शामिल कुछ नामों को देखकर दंग रह गए। अंदरूनी हलकों में यह चर्चा तेज है कि वरिष्ठ नेताओं की रायशुमारी को दरकिनार कर चहेतों को जगह दी गई थी, जिसके बाद ऊपर से आए ‘डैमेज कंट्रोल’ के निर्देशों ने जिलाध्यक्ष को कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया।
बड़ा सवाल: क्या कटेगा कई महिला नेत्रियों का पत्ता ?
अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि:
- क्या संशोधित सूची में सिर्फ नामों की स्पेलिंग सुधारी जाएगी?
- या फिर अंदरूनी विरोध के चलते कई चेहरों को कार्यकारिणी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा?
कल जिन महिला नेत्रियों ने नियुक्ति की खुशी में जश्न मनाया था, अब उनके माथे पर चिंता की लकीरें हैं। देखना दिलचस्प होगा कि आगामी ‘संशोधित सूची’ में संगठन का संतुलन सधता है या अंतर्कलह और गहराती है।
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