एमसीबी अजब है : बिना पद, बिना आदेश, शिक्षक बन बैठे अघोषित साहब
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़ |जिला एमसीबी में शिक्षा व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है। जहाँ राज्य सरकार ‘शिक्षा की गुणवत्ता’ सुधारने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं एमसीबी जिले का शिक्षा विभाग नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए भ्रष्टाचार का नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। जिले में स्कूलों को भगवान भरोसे छोड़कर दर्जनों शिक्षक जिला शिक्षा कार्यालय और विकासखंड कार्यालयों में ‘अघोषित अफसर’ बनकर मलाईदार पदों पर कुंडली मार कर बैठे हैं।
DEO के संरक्षण की फौज : बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
जब से नए जिला शिक्षा अधिकारी आर.पी. मीरे की पदस्थापना हुई है, कार्यालयों में ‘अटैचमेंट’ (संलग्नता) का खेल चरम पर पहुँच गया है। जिन शिक्षकों को स्कूलों में बच्चों का भविष्य गढ़ना था, वे अब दफ्तरों में बैठकर फाइलों और कमीशन के खेल में मशगूल हैं। आलम यह है कि जो पद स्वीकृत ही नहीं हैं, उन पर भी अवैध रूप से शिक्षकों को बैठा दिया गया है।
नियमों को ठेंगे पर रखता ‘अवैध अटैचमेंट’ का काला साम्राज्य
शासन के वर्ष 2024 के स्पष्ट आदेश की यहाँ खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शासन का नियम कहता है कि:
- किसी भी शिक्षक को कार्यालय में संलग्न नहीं किया जाएगा।
- कार्यालय में कार्य हेतु केवल ‘प्रतिनियुक्ति’ ही मान्य होगी, जिसका आदेश राज्य स्तर से होगा।
- शिक्षकों का वेतन विद्यालय के बजाय उसी कार्यालय से आहरित होगा जहाँ वे कार्यरत हैं।
लेकिन एमसीबी में क्या हो रहा है ? यहाँ शिक्षक स्कूलों के नाम पर वेतन उठा रहे हैं और सेवाएं दफ्तरों में दे रहे हैं, जिससे स्कूलों में शिक्षकों का अभाव बना हुआ है और गरीब आदिवासी बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो गई है।



‘मलाईदार’ पदों पर जमे इन ‘नियम विरुद्ध’ अफसरों की कुंडली:
- सुर्योदय सिंह (APC): मूल पद शिक्षक (MS भोता), लेकिन समग्र शिक्षा निर्माण और स्कूलों के संधारण की मलाईदार जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
- कलेश्वर पैकरा (APC): मूल पद शिक्षक (MS सेमरा), वर्तमान में नवाचारी ‘अंगना म शिक्षा’ के नाम पर दफ्तर में जमे हैं।
- गणेश यादव: मूल पद शिक्षक होने के बावजूद ‘जिला साक्षरता अधिकारी’ बने हुए हैं।
- सुशील शर्मा: सहायक शिक्षक (PS ढुलकु) होकर विकास खंड साक्षरता अधिकारी का पद हथियाए बैठे हैं।
- मनीष यादव: सहायक शिक्षक (धर्मपुर) होने के बावजूद मनेन्द्रगढ़ के संकुल समन्वयक बनकर दफ्तर की शोभा बढ़ा रहे हैं।
- सुंदर राम केवर्थ: शिक्षक (MS सीरिया खोह), वर्तमान में नियम विरुद्ध BRCC मनेन्द्रगढ़ बने बैठे हैं।
- खुश्बू दास: सहायक शिक्षक (PS कलम डांड़), जो अब जिला नोडल अधिकारी (समस्त विषय) बनकर फाइलों का निपटारा कर रही हैं।
- विनोद सोनी: शिक्षक (MS पहाड़ हँसवाहि), वर्तमान में जिला नोडल (बालवाड़ी) के पद पर मौज काट रहे हैं।
कलेक्टर की मेहरबानी या प्रशासन की लाचारी ?
हैरानी की बात यह है कि जिले के मुखिया (कलेक्टर) भी इन शिक्षकों को अपने पास बैठाकर पूरे शिक्षा विभाग का ‘भट्टा बैठाने’ पर आमादा हैं। आम जनमानस अपनी पीड़ा व्यक्त करने में असमर्थ है क्योंकि ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। राज्य शासन द्वारा बार-बार अटैचमेंट हटाने के आदेश जारी करने के बाद भी जिले के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
बड़ा सवाल: आखिर कब तक लुटेगा बच्चों का हक ?
क्या इन शिक्षकों को वेतन बच्चों को पढ़ाने के लिए मिलता है या दफ्तरों में बैठकर राजनीति करने के लिए? आखिर क्यों इन ‘अघोषित अधिकारियों’ को वापस उनके मूल स्कूलों में नहीं भेजा जा रहा है? यदि यही हाल रहा, तो MCB जिले की साक्षरता और शिक्षा का स्तर गर्त में जाने से कोई नहीं बचा पाएगा।
सवाल जो जवाब मांगते हैं :
- क्या इन शिक्षकों के कार्यालय में बैठने से उन बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं हो रहा, जिनके नाम पर इनका वेतन निकलता है?
- क्या जिला प्रशासन शासन के आदेशों से ऊपर है?
- आखिर कब तक गरीब आदिवासी बच्चों की शिक्षा की बलि चढ़ाकर इन ‘चहेते’ शिक्षकों को मलाईदार पदों पर नवाजा जाता रहेगा?
यदि समय रहते इन ‘अघोषित अधिकारियों’ को वापस इनके मूल स्कूलों में नहीं भेजा गया, तो मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिला शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ने वाला प्रदेश का पहला जिला बन जाएगा। जनता अब मूक दर्शक रहने के मूड में नहीं है।




