कलेक्टर डी राहुल वेंकट की कार्रवाई को एकपक्षीय और दोषपूर्ण बताकर कमिश्नर ने निरस्त किया कलेक्टर का निलंबन आदेश, फेडरेशन की बड़ी जीत
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़/अंबिकापुर | मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में प्रशासनिक खींचतान और कर्मचारी आंदोलन के बीच एक बड़ा उलटफेर सामने आया है। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट द्वारा निलंबित किए गए तीन कर्मचारियों को सरगुजा संभाग के आयुक्त (कमिश्नर) नरेंद्र कुमार दुग्गा ने बहाल कर दिया है। कमिश्नर कोर्ट ने कलेक्टर के आदेश को विधि और प्रक्रियाओं के विरुद्ध बताते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले प्रदेशव्यापी आंदोलन के दौरान 30 दिसंबर 2025 को तीन कर्मचारी—संजय पाण्डेय (राजस्व निरीक्षक), गोपाल सिंह (व्यायाम शिक्षक) और सुरेन्द्र प्रसाद (सफाई कर्मचारी)—कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। आरोप था कि वे कर्मचारियों से हड़ताल के लिए समर्थन मांग रहे थे, जिसे कलेक्टर ने ‘शासकीय कार्य में बाधा’ मानते हुए उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया था। इस कार्रवाई के बाद जिले में जमकर राजनीति गरमाई और कलेक्टर के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई थी।
कमिश्नर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: “बिना पक्ष सुने कार्रवाई गलत”
आयुक्त सरगुजा संभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि:
- नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन: प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा किसी व्यक्ति के हितों को प्रभावित करने वाला आदेश पारित करने से पहले उसे पक्ष रखने का युक्तियुक्त अवसर देना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं दिया गया।
- एकपक्षीय निर्णय: कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत प्रतिवाद और अपीलार्थी के दस्तावेजों के अवलोकन के बाद पाया गया कि निलंबन का आदेश नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध था।
- दोषपूर्ण आदेश: आयुक्त ने कलेक्टर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के आदेश क्रमांक 7750, 7752 और 7754 को विधि विरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया।
मंत्री के हस्तक्षेप और फेडरेशन की एकजुटता का असर
निलंबन के बाद कर्मचारी फेडरेशन ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल से मुलाकात कर इस ‘दमनकारी’ कार्रवाई की शिकायत की थी। मंत्री ने जल्द बहाली का भरोसा दिलाया था। इस बहाली को फेडरेशन की बड़ी जीत माना जा रहा है।
बहाली के साथ पुरानी जगह पदस्थापना
आयुक्त के आदेश के अनुसार:
- संजय पाण्डेय: राजस्व निरीक्षक, नगर पंचायत झगराखाण्ड को पूर्व पदस्थापना स्थान पर बहाल किया गया है।
- गोपाल सिंह: व्याख्याता, शा.उ.मा.वि. बेलबहरा को उनकी मूल संस्था में वापस भेजा गया है।
- सुरेन्द्र प्रसाद: सफाई कर्मचारी, नगर पंचायत झगराखाण्ड को भी सेवा में बहाल कर दिया गया है। इन सभी कर्मचारियों की निलंबन अवधि को कार्य अवधि मान्य करते हुए प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया गया है।
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