अंबिकापुर रोड बना ‘वॉटर पार्क’, भीषण गर्मी में बर्बादी का तमाशा, प्रशासन की चुप्पी से आक्रोश
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़। एक ओर जहां सूरज की तपिश और पारा चढ़ते ही पूरा जिला बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने लगा है, वहीं मनेन्द्रगढ़ के नदीपार, अंबिकापुर रोड स्थित मेट्रो हॉस्पिटल के सामने नजारा कुछ और ही बयां कर रहा है। यहाँ मुख्य मार्ग पर जल भराव की स्थिति ऐसी हो गई है कि यह सड़क नहीं, बल्कि पानी का ‘उद्गम स्थल’ प्रतीत होने लगा है। विडंबना देखिए कि यह कोई बरसात का पानी नहीं, बल्कि रोजाना व्यर्थ बहता हुआ वह जल है जिसे सहेजने की नसीहतें शासन-प्रशासन के विज्ञापनों में गूंजती हैं।
सुबह की सैर का बदला रास्ता, गाड़ियों को लगा ‘गड्ढे’ का डर
शहर के जागरूक नागरिक और रामनरेश वकील ने इस समस्या को लेकर कई बार हुक्मरानों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन स्थिति ‘जस की तस’ बनी हुई है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि:

- मॉर्निंग वॉकर्स ने बदला रूट: जो लोग ताजी हवा के लिए सुबह इस मार्ग पर निकलते थे, अब कीचड़ और जल-जमाव के डर से गलियों से गुजरने को मजबूर हैं।
- बड़ी गाड़ियों के थमे पहिए: भारी वाहन चालक भी इस मार्ग से गुजरने में कतरा रहे हैं। सड़क के बीचों-बीच जमा पानी के कारण यह आशंका बनी रहती है कि नीचे कोई गहरा गड्ढा न हो, जो किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे दे।
प्रधानमंत्री की ‘कैच द रेन’ मुहिम को ठेंगा ?
एक ओर जहां कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में पानी बचाने के लिए सोख्ता गड्ढों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है, जिसकी प्रशंसा स्वयं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की है, वहीं शहर के बीचों-बीच जल संरक्षण की ऐसी धज्जियां उड़ना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।
क्या प्रशासन ने गर्मी से राहत देने के लिए सड़क पर ‘जल-भराव योजना’ शुरू की है? अगर यही पानी संरक्षित किया जाता तो शहर के कई कंठों की प्यास बुझ सकती थी।
— रामनरेश वकील, स्थानीय नागरिक
बढ़ती गर्मी और प्रशासनिक उदासीनता
क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि यह पानी किसी प्राकृतिक आपदा का नहीं, बल्कि अव्यवस्था की देन है। यदि गर्मी के इस शुरुआती दौर में ही सड़क पर समुद्र सा नजारा है, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह होगी। शासन-प्रशासन को चाहिए कि:
- लीकेज या निकासी की जांच: अविलंब पता लगाया जाए कि जल भराव का स्रोत क्या है।
- सड़क की मरम्मत: गड्ढों के अंदेशे को खत्म कर सड़क को सुरक्षित बनाया जाए।
- जल संरक्षण: व्यर्थ बहते इस पानी को सहेजने की व्यवस्था हो ताकि गिरते भू-जल स्तर को सहारा मिले।
मनेन्द्रगढ़ की जनता अब इस ‘कृत्रिम झील’ से छुटकारा चाहती है। देखना यह है कि प्रशासन कुंभकर्णी नींद से कब जागता है या फिर राहगीरों को इसी तरह ‘सड़क मार्ग’ की जगह ‘जल मार्ग’ का अनुभव लेना पड़ेगा।
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