मनेन्द्रगढ़ की फिजाओं में घुली सियासी मिठास : स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल की ‘पीठ थपथपाने’ पर लक्ष्मी रजवाड़े का बड़ा पलटवार – सच बोलने से रोक नहीं पाई राजनीति
नई पहल न्यूज नेटवर्क। सूरजपुर/मनेन्द्रगढ़/रायपुर। कहते हैं राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता, लेकिन जब ‘दुश्मन’ खुद आपकी काबिलियत की गवाही देने लगे, तो समझ लीजिए कि काम बोल रहा है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसा ही ‘चमत्कार’ देखने को मिल रहा है। विधानसभा के कद्दावर नेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा भाजपा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल की खुले मंच से तारीफ करने के बाद, अब महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने मोर्चा संभाल लिया है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए लक्ष्मी रजवाड़े ने बड़ी ही शालीनता और राजनीतिक सूझबूझ के साथ महंत के बयान को सरकार की ‘सफलता का सर्टिफिकेट’ करार दिया है।
“प्रतिपक्ष के नेता का दिल जीतना बड़ी उपलब्धि”
मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने ‘नयी पहल’ से बातचीत में कहा, “मैंने डॉ. महंत जी का वक्तव्य सुना। वे विपक्ष के बड़े नेता हैं, वे चाहते तो कमियां निकाल सकते थे, लेकिन उन्हें भी महसूस हो रहा है कि पिछली सरकार की तुलना में आज छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं कहीं अधिक सुदृढ़ हैं। स्थानीय विधायक और मंत्री (श्यामबिहारी जायसवाल) दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और विरोधियों का सच स्वीकार करना ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।”
‘सच’ और ‘मशीन’ का वो दिलचस्प किस्सा
गौरतलब है कि हाल ही में मनेन्द्रगढ़ में डॉ. महंत ने श्यामबिहारी जायसवाल को ‘अपना क्षेत्र का मंत्री’ बताते हुए उनके काम की सराहना की थी। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा था कि— “महंत जी जानते हैं कि अगर वे झूठ बोलेंगे तो (लाई डिटेक्टर) मशीन उन्हें पकड़ लेगी।” अब इस पूरी बहस में लक्ष्मी रजवाड़े के बयान ने घी का काम किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि भाजपा के मंत्रियों का काम इतना पारदर्शी है कि विपक्ष के पास आलोचना के शब्द कम पड़ रहे हैं।
गुटबाजी के दांव को किया ‘डिफ्यूज’
जब लक्ष्मी रजवाड़े से पूछा गया कि क्या महंत जी भाजपा के भीतर ‘गुटबाजी’ को हवा दे रहे हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा— “ऐसा बिल्कुल नहीं है। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन जनहित के कामों को स्वीकार करना एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। महंत जी ने जो कहा, वह उनके मन की सच्चाई है।”



नई पहल की पैनी नजर:
”छत्तीसगढ़ की इस ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ के पीछे कई मायने छिपे हैं। मनेन्द्रगढ़ की धरती से उठी यह सियासी लहर बता रही है कि आने वाले समय में विकास के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच की लकीरें धुंधली हो सकती हैं।”




