15वें नेशनल यंग थिंकर्स मीट में संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार, राम माधव और डॉ. निशंक ने किया लोकार्पण; भारत के सांस्कृतिक एकात्म को बयां करती है यह कृति
नई पहल न्यूज नेटवर्क। देहरादून (उत्तराखंड)। लेखक गांव में आयोजित 15वें नेशनल यंग थिंकर्स मीट-2026 के उद्घाटन सत्र में आज एक ऐतिहासिक बौद्धिक विमर्श देखने को मिला। यहाँ जनसंवाद के संयोजक एवं लोकनीति इंडिया के अध्यक्ष सत्येंद्र त्रिपाठी की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘एकात्म यात्रा’ का गरिमामयी माहौल में लोकार्पण किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार, इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राम माधव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने संयुक्त रूप से इस वैचारिक कृति का विमोचन किया।
सर्व भाषा ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक अपनी आधिकारिक लॉन्चिंग से पहले ही भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन विमर्श में एक नया कीर्तिमान रच चुकी है। बाज़ार में आने से पहले ही पाठकों के बीच इसे लेकर ऐसा क्रेज दिखा कि यह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘अमेज़न’ पर प्री-बुकिंग के दौरान ही बेस्टसेलर सूची में शीर्ष स्थान पर काबिज हो गई। विमोचन कार्यक्रम में जुटे देश भर के विचारकों और वक्ताओं ने इसे जनसंवाद और लोकनीति के क्षेत्र में एक नई दृष्टि प्रदान करने वाली और समकालीन विमर्श में एक बड़ा व महत्वपूर्ण हस्तक्षेप बताया।
विविधता में छिपे ‘एकात्म’ का जीवंत दस्तावेज
पुस्तक के मुख्य अंश भारत की उस शाश्वत चेतना को रेखांकित करते हैं, जिसे अक्सर बाहरी तौर पर विखंडित मान लिया जाता है। लेखक सत्येंद्र त्रिपाठी ने अपनी इस कृति के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि भारत की भाषिक, सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता वास्तव में उसका बिखराव नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे गहरे एकात्म का ही बाहरी रूप है।
“भारत एक माला की तरह दिखाई देता है। फूल भिन्न हैं, रंग भिन्न हैं, गंध भिन्न है, पर सूत्र एक है।”
पुस्तक के अनुसार, अलग-अलग लोकविश्वासों और पृष्ठभूमियों के बावजूद भारत के भीतर एक ऐसी सांस्कृतिक अंत:सलिला (छिपी हुई नदी) बहती है, जो सबको आपस में जोड़ती है। यह अटूट बंधन धर्म, स्मृतियों, पारिवारिक मूल्यों और लोकमर्यादा का है, जिसे शब्दों में बांधना भले कठिन हो, लेकिन इसे हर भारतीय अपनी आत्मा में महसूस करता है।
वैचारिक जगत में ‘एकात्म यात्रा’ का प्रभाव
यंग थिंकर्स मीट में इस पुस्तक के विमोचन को देश के बौद्धिक परिदृश्य के लिए एक बड़ी घटना माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘एकात्म यात्रा’ केवल एक यात्रा वृत्तांत या वैचारिक संकलन नहीं है, बल्कि यह आज के दौर में भारत को उसकी जड़ों से जोड़ने और नीति-निर्धारकों को लोक-नीति का सही मायना समझाने वाला एक मार्गदर्शक दस्तावेज साबित होगी। अमेजन पर इसकी जबरदस्त सफलता ने यह साफ कर दिया है कि देश का युवा और प्रबुद्ध वर्ग अब सतही विमर्श से इतर भारत की मूल सांस्कृतिक पहचान को गहराई से समझने के लिए उत्सुक है।
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