जानिए किसके सिर सजेगा ताज और किसका होगा सूपड़ा साफ़ — सबसे सटीक आंकड़े !
नई पहल न्यूज नेटवर्क। नई दिल्ली। पांच राज्यों की 824 विधानसभा सीटों पर किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद हो चुका है। जहाँ असम में भाजपा अपनी हैट्रिक की ओर बढ़ती दिख रही है, वहीं केरल से आने वाले एग्जिट पोल्स ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है।
राज्यवार विश्लेषण: कहाँ क्या बदल रहा है ?
पश्चिम बंगाल: ‘खेला’ अभी बाकी है !
बंगाल में ‘पीपल्स पल्स’ ने ममता बनर्जी को 177-187 सीटें देकर एकतरफा बढ़त दिखाई है, जबकि ‘मैटराइज’ ने इसे कड़े मुकाबले के साथ भाजपा को 130 के करीब दिखाया है।
- बड़ी बात: महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान टीएमसी के लिए ‘साइलेंट वोट’ साबित हो सकता है।
तमिलनाडु: स्टालिन की लहर, ‘थलापति’ विजय की एंट्री
यहाँ एम.के. स्टालिन की सत्ता में वापसी तय मानी जा रही है। लेकिन सबसे दिलचस्प है दक्षिण के सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK का प्रदर्शन, जिसे एग्जिट पोल्स में 10 से 18 सीटें मिलने का अनुमान है। यह भविष्य में तीसरे मोर्चे की मजबूत आहट है।
केरल: इतिहास पलटने के संकेत!
केरल में इस बार रिवाज बदलता नहीं, बल्कि सरकार बदलती दिख रही है। ‘मैटराइज’ के अनुसार, कांग्रेस नीत UDF को 70-75 सीटें मिल रही हैं, जो मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के सपने को तोड़ सकता है।
असम: हिमंत का ‘अजेय’ किला
असम में भाजपा नीत एनडीए को किसी भी एजेंसी ने बहुमत से नीचे नहीं रखा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का जादू एक बार फिर चलता दिख रहा है। विपक्ष (कांग्रेस+) यहाँ 40 सीटों का आंकड़ा छूने के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है।
एग्जिट पोल्स की ‘Exclusive’ बड़ी बातें
- रिकॉर्ड मतदान: पश्चिम बंगाल का 92.88% मतदान इस बात का संकेत है कि जनता या तो सत्ता के खिलाफ जबरदस्त गुस्से में थी या फिर अपनी योजनाओं को बचाने के लिए डटकर खड़ी थी।
- तीसरा मोर्चा: तमिलनाडु में TVK और असम में रैजोर दल जैसे छोटे दल किंगमेकर तो नहीं, लेकिन ‘वोट कटवा’ की भूमिका में बड़े दलों का खेल बिगाड़ते दिख रहे हैं।
- मोदी फैक्टर: पुडुचेरी और असम में पीएम मोदी की रैलियों का असर सीटों के बढ़ते आंकड़ों में साफ देखा जा सकता है।
दिग्गज एजेंसियों की भविष्यवाणियां
Matrize: “केरल में सत्ता विरोधी लहर और तमिलनाडु में डीएमके की मजबूत पकड़, यही 2026 की कहानी है।”
People’s Pulse: “बंगाल में टीएमसी की पकड़ कमजोर नहीं हुई है, ध्रुवीकरण के बावजूद ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा भारी पड़ रहा है।”
अगला पड़ाव: 4 मई, 2026
सभी की नजरें अब 4 मई पर टिकी हैं जब आधिकारिक परिणाम आएंगे। क्या एग्जिट पोल्स सटीक साबित होंगे या ईवीएम से कोई ‘चमत्कारी’ नतीजा निकलेगा? पल-पल की अपडेट के लिए बने रहें।
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