मुख्यमंत्री सचिवालय में प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की कवायद, पांचों संभागों के लिए अलग-अलग प्रभारी अधिकारी नियुक्त
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। मुख्यमंत्री सचिवालय में अब फाइलों का नया रास्ता और फैसलों का नया ढांचा तय हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार ने सचिवालय के छह प्रमुख अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों का ऐसा बंटवारा किया है, जो आने वाले दिनों में शासन की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक कार्यशैली की दिशा तय करेगा। वित्त और खनिज से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह, पंचायत और नगरीय प्रशासन तक हर बड़े विभाग की कमान अलग-अलग अफसरों को सौंप दी गई है, जबकि सरगुजा से बस्तर तक संभागवार निगरानी की नई व्यवस्था भी लागू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री सचिवालय का ‘पावर सेंटर’ बने रहेंगे सुबोध कुमार सिंह

प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह के पास मुख्यमंत्री सचिवालय की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रहेंगी।
उनके अधीन होंगे—
- राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग से जुड़े विषय
- मंत्रिपरिषद से संबंधित मामले
- सभी AIS अधिकारियों एवं विभागाध्यक्षों से जुड़े प्रकरण
- मुख्यमंत्री विशेष परियोजनाएं
- जन घोषणा पत्र
- कलेक्टर-एसपी सम्मेलन
- सचिवालय का समन्वय एवं प्रशासनिक नियंत्रण
विभागीय जिम्मेदारी
- सामान्य प्रशासन विभाग
- खनिज साधन विभाग
- विधि एवं विधायी कार्य
- वित्त विभाग
- वाणिज्य एवं उद्योग विभाग
मुख्यमंत्री घोषणाओं की मॉनिटरिंग करेंगे मुकेश कुमार बंसल

सचिव मुकेश कुमार बंसल को मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा और सचिवालय के कार्मिक मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।



इनके अधीन विभाग
- जनसंपर्क
- कृषि एवं किसान कल्याण
- पशुधन विकास
- मत्स्य पालन
- सहकारिता
- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति
- ऊर्जा
- जल संसाधन
- आबकारी
- वन एवं जलवायु परिवर्तन
संभागीय जिम्मेदारी
रायपुर संभाग की निगरानी और समीक्षा की जिम्मेदारी भी इन्हें सौंपी गई है।
स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी और मुख्यमंत्री सहायता कोष की कमान पी. दयानंद को

सचिव पी. दयानंद को मुख्यमंत्री सहायता कोष, विवेकाधीन निधि और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से जुड़े मामलों का प्रभार सौंपा गया है।
इनके अधीन विभाग
- लोक निर्माण विभाग
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
- चिकित्सा शिक्षा
- जीएसटी
- पंजीयन
- संसदीय कार्य
संभागीय जिम्मेदारी
बिलासपुर संभाग की समीक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी भी इनके पास रहेगी।
गृह, पर्यटन और खेल विभाग संभालेंगे राहुल भगत

सचिव राहुल भगत को मुख्यमंत्री निवास से जुड़े समस्त समन्वय कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है।
इनके अधीन विभाग
- गृह
- जेल
- परिवहन
- संस्कृति
- पर्यटन
- धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व
- खेल एवं युवा कल्याण
- आदिम जाति विकास
- पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास
- महिला एवं बाल विकास
- समाज कल्याण
संभागीय जिम्मेदारी
बस्तर संभाग के प्रभारी अधिकारी भी राहुल भगत होंगे।
रजत बंसल को सरगुजा संभाग समेत शिक्षा और पंचायत की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री सचिवालय के नए आदेश में रजत बंसल को मिली अतिरिक्त जिम्मेदारियों की है। वर्तमान में वे आयुक्त जनसंपर्क और स्पेशल सेक्रेटरी टू सीएम की दोहरी भूमिका निभा रहे हैं।
अब उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में सुशासन तिहार, सूचना का अधिकार और जनप्रतिनिधियों से जुड़े विषयों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
इनके अधीन विभाग
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास
- सुशासन एवं अभिसरण
- ग्रामोद्योग
- आवास एवं पर्यावरण
- लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी
- स्कूल शिक्षा
- उच्च शिक्षा
- विमानन
संभागीय जिम्मेदारी
सरगुजा संभाग की कमान भी रजत बंसल को सौंपी गई है।
प्रशासनिक गलियारों में इसे मुख्यमंत्री के भरोसे का बड़ा संकेत माना जा रहा है, क्योंकि सरकार की कई फ्लैगशिप योजनाएं इन्हीं विभागों के माध्यम से संचालित होती हैं।
जनदर्शन से लेकर नगरीय प्रशासन तक प्रभात मलिक के जिम्मे

संयुक्त सचिव प्रभात मलिक को मुख्यमंत्री जनदर्शन, जनशिकायत और मुख्यमंत्री के समय प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
इनके अधीन विभाग
- राजस्व एवं आपदा प्रबंधन
- पुनर्वास
- श्रम
- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी
- नगरीय प्रशासन
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी
- कौशल विकास एवं रोजगार
- जन शिकायत निवारण
संभागीय जिम्मेदारी
दुर्ग संभाग की जिम्मेदारी भी प्रभात मलिक को सौंपी गई है।
क्या हैं इस फैसले के मायने ?
मुख्यमंत्री सचिवालय में किया गया यह कार्य विभाजन केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं का रोडमैप भी माना जा रहा है। जवाबदेही तय करने, विभागीय समन्वय बढ़ाने और संभाग स्तर तक निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से जिम्मेदारियों का यह नया ढांचा तैयार किया गया है।
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि सरकार ने विकास, शिक्षा, पंचायत, स्वास्थ्य, कृषि, गृह और नगरीय प्रशासन जैसे प्रमुख क्षेत्रों को अलग-अलग अधिकारियों के बीच स्पष्ट रूप से विभाजित कर जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश की है।










