हाईकोर्ट की रोक के बाद हमलावर हुए नेता प्रतिपक्ष, बोले- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली चयन समिति पर हो तत्काल एफआईआर
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर|छत्तीसगढ़ में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब और तेज हो गया है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्तियों पर रोक लगाए जाने के बाद विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। डॉ. महंत ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ थी और भर्ती निष्पक्ष थी, तो आखिर फिजिकल टेस्ट के सीसीटीवी फुटेज किसके इशारे पर नष्ट किए गए?
हाईकोर्ट के फैसले से कांग्रेस के आरोपों पर लगी मुहर
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही पुलिस भर्ती में भारी अनियमितता और आर्थिक लेनदेन के आरोप लगा रही थी। उन्होंने याद दिलाया कि विधानसभा सत्र के दौरान सरकार ने केवल राजनांदगांव और बिलासपुर में गड़बड़ी स्वीकार की थी, जबकि बाकी जिलों को ‘क्लीन चिट’ दे दी थी।

“माननीय उच्च न्यायालय का ताजा फैसला इस बात का प्रमाण है कि पूरी प्रदेशव्यापी भर्ती प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है। कोर्ट द्वारा नियुक्तियों पर रोक लगाना हमारी चिंताओं और युवाओं के संघर्ष की जीत है।” – डॉ. चरणदास महंत
सुशासन या ‘भविष्य से खिलवाड़’?
भाजपा सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘सुशासन’ के नारों पर तंज कसते हुए डॉ. महंत ने कहा कि प्रदेश का युवा आज ठगा महसूस कर रहा है। उन्होंने सरकार से तीखे सवाल पूछे:
- जिम्मेदारी किसकी?: भर्ती में देरी और धांधली के कारण जिन अभ्यर्थियों की आयु सीमा समाप्त हो जाएगी, उनका भविष्य कौन संवारेगा?
- सबूत क्यों मिटाए?: पारदर्शिता का दावा करने वाली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को विनिष्टीकरण क्यों किया?
चयन समिति के अधिकारियों पर हो कड़ी कार्रवाई
डॉ. महंत ने मांग की है कि नैतिकता के आधार पर सरकार को अब चुप नहीं बैठना चाहिए। हर जिले में गठित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की चयन समिति, जो इस धांधली के लिए जिम्मेदार है, उन पर तत्काल दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक युवाओं को न्याय नहीं मिलता और दोषियों को सजा नहीं होती, कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से सदन तक जारी रखेगी।
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