अनोखा प्रदर्शन: मनेंद्रगढ़ में ब्लॉक कांग्रेस ने धान खरीदी केंद्रों पर भ्रष्टाचार के खिलाफ खोला मोर्चा, समिति प्रबंधक को सौंपा पिंजरा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के बीच ‘चूहों’ के नाम पर मचे घमासान ने अब राजनीतिक रुख अख्तियार कर लिया है। शुक्रवार को चैनपुर धान खरीदी केंद्र पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर ने एक ऐसा प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया, जिसकी चर्चा पूरे जिले में है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धान के नाम पर हो रहे कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए समिति प्रबंधक को बाकायदा ‘चूहा पकड़ने की जाली’ भेंट की। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार चूहों का बहाना बनाकर किसानों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रही है।
“चूहा नहीं, भ्रष्टाचारी खा रहे किसानों का धान”
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में एक जैसा पैटर्न सामने आ रहा है—”धान को चूहों ने नुकसान पहुँचाया।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सरकार के संरक्षण में चल रहा सुनियोजित और संगठित घोटाला है। मिश्रा ने कहा, “किसान दिन-रात पसीना बहाकर फसल उगाता है, लेकिन खरीदी केंद्रों पर चूहों की आड़ में किसानों के हक की कटौती की जा रही है।”

सड़क से सदन तक लड़ाई का शंखनाद
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने इस दौरान सरकार को जमकर घेरा:
- प्रभा पटेल (पूर्व नपा अध्यक्ष): “भाजपा की नीतियां किसान विरोधी हैं, सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है।”
- राजकुमार केसरवानी (वरिष्ठ नेता): “असली दोषियों को बचाने के लिए बेजुबान चूहों को बदनाम किया जा रहा है।”
- अनिल प्रजापति (नेता प्रतिपक्ष): “यह तो बस ट्रेलर है, भ्रष्टाचार नहीं रुका तो उग्र आंदोलन होगा।”
दहशत में तंत्र ? जाली भेंट कर दिया कड़ा संदेश
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जब पिंजरा (चूहा पकड़ने की जाली) प्रबंधक को सौंपा, तो वहां मौजूद किसान और ग्रामीण भी इस अनोखे विरोध के गवाह बने। कांग्रेस का तर्क है कि यदि धान वास्तव में चूहे खा रहे हैं, तो प्रशासन पिंजरे लगाए, न कि किसानों के वजन में कटौती करे। पूर्व उपाध्यक्ष कृष्ण मुरारी तिवारी और महिला कांग्रेस अध्यक्ष रूमा चटर्जी ने भी पारदर्शिता खत्म होने पर चिंता जताई।
प्रदर्शन में इनकी रही मौजूदगी:
इस आंदोलन में सौरव मिश्रा, प्रभा पटेल, राजकुमार केसरवानी, कृष्ण मुरारी तिवारी, अनिल प्रजापति, हाफिज मेमन, रूमा चटर्जी, अमोल सिंह, अमर सिंह श्याम सहित अजय जायसवाल, स्वप्निल सिन्हा, पूनम सिंह, स्नेहिल शुक्ला और बड़ी संख्या में स्थानीय किसान एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।
About The Author










































