सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे की संवेदनशीलता ने पेश की जनसेवा की अनूठी मिसाल, अब लाचार और गरीब महिला को नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर
नई पहल न्यूज नेटवर्क। एमसीबी। जब सरकारी व्यवस्थाएं संवेदनशीलता की स्याही से लिखी जाती हैं, तो वे सिर्फ नियम-कायदे नहीं, बल्कि किसी असहाय का संबल बन जाती हैं। छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मानवता और जनसेवा का एक ऐसा ही जीवंत उदाहरण पेश किया है। भालू के हमले में अपनी एक आंख गंवा चुकी ग्राम चिडोला की अत्यंत गरीब और लाचार महिला प्रेमबाई गोंड को अब अपने हक के दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए अस्पतालों और दफ्तरों की चौखट पर माथा नहीं टेकना पड़ेगा। मामले की गंभीरता और महिला की लाचारी को समझते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अविनाश खरे ने एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है—अब जिला मेडिकल बोर्ड खुद चलकर पीड़िता के घर पहुंचेगा।
भालू के हमले ने छीनी आंख, गरीबी ने तोड़ी कमर
गौरतलब है कि ग्राम चिडोला निवासी प्रेमबाई गोंड पर बीते वर्ष 20 जून 2025 को एक भालू ने जानलेवा हमला कर दिया था। इस भयानक हादसे में प्रेमबाई की एक आंख पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और वे दिव्यांग हो गईं। इस हादसे ने न सिर्फ उन्हें शारीरिक रूप से तोड़ दिया, बल्कि उनका जीवन गहरे आर्थिक संकट में घिर गया।

वन विभाग से मिलने वाली बीमा सहायता और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए उन्हें ‘दिव्यांग प्रमाण पत्र’ की सख्त जरूरत थी। लेकिन, मनेन्द्रगढ़ तक आने-जाने का खर्च उठाने में असमर्थ और शारीरिक रूप से अक्षम प्रेमबाई के लिए प्रशासनिक औपचारिकताएं एक पहाड़ जैसी बाधा बन चुकी थीं।
जब फाइल से बाहर निकलकर ‘सक्रिय’ हुई प्रशासनिक संवेदना
जब इस बेबस महिला की तकलीफों की गूंज सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे तक पहुंची, तो उन्होंने इसे महज एक रूटीन प्रशासनिक मामला नहीं माना। डॉ. खरे ने तात्कालिक रूप से संवेदनशीलता दिखाते हुए निर्देश जारी किए कि मानवता को सर्वोपरि रखा जाए और पीड़िता को हर हाल में राहत दी जाए।
”प्रशासन का उद्देश्य केवल दफ्तरों से योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि हर उस अंतिम और जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचना है जो खुद चलकर हम तक नहीं आ सकता। प्रेमबाई की मदद करना हमारा सामाजिक और प्रशासनिक दायित्व है।”
– जिला प्रशासन
बुधवार को गांव पहुंचेगी डॉक्टरों की टीम, मौके पर ही बनेगा सर्टिफिकेट
तय रणनीति के अनुसार, बुधवार को विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की एक विशेष टीम (जिला मेडिकल बोर्ड) सीधे ग्राम चिडोला में प्रेमबाई के घर दस्तक देगी। टीम मौके पर ही महिला का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण करेगी और सभी जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया को ऑन-द-स्पॉट पूरा करते हुए नियमानुसार दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करेगी। इस पहल से पीड़िता को वन विभाग की बीमा राशि और अन्य शासकीय लाभ मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
ग्रामीणों ने सराहा: “यही है जनसेवा का असली स्वरूप”
प्रशासन के इस अप्रत्याशित और मानवीय कदम ने ग्रामीणों और पीड़िता के परिजनों के दिलों को छू लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में जहां मामूली कामों के लिए भी गरीबों को भटकना पड़ता है, वहां पूरा मेडिकल बोर्ड खुद चलकर एक गरीब के घर आ रहा है; यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। ग्रामीणों ने मुक्तकंठ से डॉ. अविनाश खरे और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि इस फैसले ने साबित कर दिया है कि सरकार सिर्फ वादों में नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में उनके साथ खड़ी है।
बड़ा संदेश:
यह घटना व्यवस्था पर आम जनता के भरोसे को और मजबूत करती है। जब प्रशासनिक अधिकारी अपनी शक्ति का इस्तेमाल नियमों के जाल बुनने के बजाय किसी की तकलीफ कम करने के लिए करते हैं, तो वह ‘सुशासन’ की सबसे खूबसूरत तस्वीर बन जाती है।
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